मोदी की जापान डिप्लोमेसी से क्या हासिल होगा?

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हाल में शिंज़ों अबे भारत में अहमदाबाद के दौरे पर आए थे जहां उन्होंने बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया. उन्होंने मोदी के साथ एक रोडशो किया और इस दौरान मोदी के साथ उनके दोस्ताना संबंध दिखे जिसकी मीडिया में खासी चर्चा भी हुई.

हाल फिलहाल में मोदी के अपने पड़ोसी देशों के नेताओं के साथ दोताना संबंधों के बेहद अच्छे नतीजे देखने को नहीं मिले हैं.

मोदी जापान से क्यों चाहते हैं टू-प्लस-टू ?

दिसंबर 2015 को मोदी अचानक नवाज़ शरीफ से मिलने लाहौर पहुंचे. उनकी इस 'बर्थडे डिप्लोमेसी' को विश्व समुदाय ने काफ़ी सराहा लेकिन इसके एक हफ़्ते के भीतर पठानकोट हमला हो गया. इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते पटरी से उतर गए और रिश्तों में तल्खी अब तक बरकरार है.

वहीं मोदी की चीन यात्रा और उससे पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं के संबंधों की चर्चा हुई. लेकिन मोदी की चीन यात्रा के कुछ महीनों बाद डोकलाम विवाद के कारण सीमा पर बंदूकें तनी तो बात ख़त्म होने में हफ्तों लगे.

एक तरफ भारत के अपने पड़ोसियों- चीन और पाकिस्तान के साथ तल्ख रिश्ते तो दूसरी तरफ एशिया प्रशांत में उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षण के कारण जारी तनाव के बीच भारत और जापान के बीच बढ़ता सोहार्दय.

जापान से साथ भारत की घनिष्ठता के मायने?

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के पारिवारिक निवास रायविंद पैलेस उनसे मुलाक़ात की थी.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर हर्ष वी पंत का नज़रिया

भारत और जापान के संबंध बहुत घनिष्ठ हो गए हैं और पिछले तीन-चार सालों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे की पर्सनल दोस्ती से भी इसे गति मिली है.

भारत के साथ जापान से संबंधों की तुलना भारत के चीन और पाकिस्तान के संबंधों के साथ नहीं की जा सकती. चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों को दोस्ताना तो नहीं कहा जाएगा.

बुलेट ट्रेन की राह में क्या हैं चुनौतियां

भारत-जापान मिलकर चीन को जवाब देना चाहते हैं?

चीन के साथ भारत की समस्याएं अलग है. चीन के साथ सीमा को लेकर विवाद अभी तक चल रहा था, पाकिस्तान के साथ भी चरमपंथ को ले कर हमारे विवाद है.

लेकिन जापान पहले से भारत का मित्र रहा है ओर उसके हमारे साथ कोई विवाद नहीं हैं. लेकिन जापान के अपने सांसकृतिक और राजनीतिक कारण रहे जिस कारण विवाद ना होने के बावजूद उनके साथ संबंध आगे नहीं जा पा रहे थे.

लेकिन पिछले कुछ सालों में ये देखने में आ रहा है कि चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है. उसको देखते हुए जापान चाहता है कि भारत के साथ उनके घनिष्ठ संबंध हों जिससे कि चीन को ले कर एक बैलेंस ऑफ़ पावर बन पाए.

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तकनीक के क्षेत्र में जापान एशिया का सबसे एडवांस्ड देश है. भारत चाहता है कि कैसे वो जापान के तकनीकी विकास से लाभ ले सके.

भारत चाहता है कि कश्मीर के मुद्दे पर जापान उसका समर्थन करे. उसी तरह उत्तर कोरिया के मामले में जापान चाहता है कि भारत की तरफ से एक कड़ा संदेश जाए. भारत में भी साझा बयान में कहा कि उत्तर कोरिया को एक ज़िम्मेदार राष्ट्र के रूप में व्यवहार करना चाहिए.

अब एशिया प्रशांत में जो समीकरण बन रहा है वो ये है कि भारत-जापान के, ऑस्ट्रेलिया-वियतनाम-फिलीपीन्स और अमरीका के बहुत घनिष्ठ संबंध बन रहे हैं और दूसरी तरफ चीन के जो संबंध बन रहे हैं वो उत्तर कोरिया के साथ हैं जिन्हें वो बचाना चाहता है.

चीन के इस रवैये से जापान को परेशानी हो रही है और जापान चाहता है कि भारत के साथ उसके सुदृढ़ रिश्ते हों.

शिज़ो अबे ने अब जापान की जो विदेश नीति बनाई है वो काफी महत्वाकाक्षी है जिसके चलते आने वाले समय में भारत को फायदा होगा. भारत भी ये चाहता है कि और देश एक साथ आएं और इस तरह खड़े हों कि एशिया प्रशांत में चीन का जो एकछत्र प्रभाव बनता नज़र आ रहा है वो थम जाए.

विभिन्न घटनाओं पर बेबाक़ राय रखने वाले सेलिब्रिटी सलाहकार सुहैल सेठ कहते हैं कि भारत को जापान और भारत को एक साथ खड़े हो कर उत्तर कोरिया के शासन के ख़िलाफ़ विश्व समुदाय को एक संदेश देने की ज़रूरत है.

सुहैल सेठ का नज़रिया

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Image caption इसी सप्ताह उत्तर कोरिया ने अपनी राजधानी प्योंगयांग से पूर्वी दिशा में जापान की ओर फिर एक मिसाइल छोड़ी है. दक्षिण कोरिया और जापान की सरकार ने इसकी पुष्टि की है.

पाकिस्तान और चीन के साथ हमारे रक्षा संबंधी यानी सीमा सुरक्षा के मुद्दे हैं लेकिन जापान के साथ ऐसा नहीं है . साथ ही दोनों देशों के बीच हमेशा से आर्थिक साझेदारी ही मुख्य मुद्दा रहा है. इस क्षेत्र में दोनों नेताओं ने अच्छा काम किया है.

मैं समझता हूं कि भारत को उत्तर कोरिया को ये संकेत भेजना चाहिए कि हम एकछत्रवाद शासन को बर्दाश्त नहीं करेंगे. सदियों से भारत की विदेश नीति का एक ही मुद्दा है कि भारत गणतंत्र का समर्थन करता है और नहीं चाहता कि लोग झगड़े या युद्ध में पड़े.

भारत मे नॉन अलाइन मूवमेंट शुरू किया था. भारत और जापान की सरकारें इस बात को ले कर स्पष्ट है कि हम एकछत्रवादी शासन को स्वीकार नहीं करते.

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