गुजरात मॉडल को बचाने के लिए बीजेपी ने योगी को उतारा?

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क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और हिन्दुत्व का चेहरा कहे जाने वाले योगी आदित्यनाथ गुजरात चुनावों में बीजेपी की मदद कर पाएंगे?

बीजेपी ने एक अक्टूबर से शुरू हुई गुजरात गौरव यात्रा में योगी आदित्यनाथ को प्रचार के लिए उतारा है. यह यात्रा सरदार वल्ल्भभाई पटेल के जन्मस्थान करमसद से शुरू हुई थी.

योगी ने परडी टाउन, चिखली और दक्षिण गुजरात के दूसरे हिस्सों में शुक्रवार को जनसभाओं को संबोधित किया. शनिवार को प्रचार के लिए योगी कच्छ ज़िले में जाएंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि हिंदुत्व का एजेंडा लेकर आगे बढ़ना बीजेपी की मजबूरी है ताकि दक्षिण गुजरात में अपना पुराना वोट बैंक वापस हासिल कर पाए.

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बीजेपी ने बदला रुख

सूरत के वरिष्ठ पत्रकार फ़यसल बकीली कहते हैं, ''जब योगी को यूपी का सीएम बनाया गया, वह देश में मोदी के बाद दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता थे. लेकिन योगी बीजेपी के लिए हिंदू चेहरा बने रहे. देश को अभी भी इंतज़ार है कि योगी अपने कार्यकाल में प्रदेश में कौन से विकास कार्य करते हैं.

बीजेपी ने अब तक दो यात्राएं निकाली हैं- आदिवासी यात्रा और अब गौरव यात्रा. दोनों यात्राओं में बीजेपी को ख़ास रिस्पॉन्स नहीं मिला जिसके बाद अब पार्टी ने हिंदुत्व के चेहरे का रुख किया.

इसके अलावा दक्षिण गुजरात में बहुत से उत्तर भारतीय भी रहते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, दक्षिण गुजरात में 15 लाख से ज़्यादा उत्तर भारतीय (ख़ासकर उत्तर प्रदेश और बिहार) रहते हैं.

योगी सूरत में शुक्रवार को उद्योगपतियों से मुलाक़ात करेंगे इनमें उत्तर भारत के बिजनेसमैन भी शामिल हैं. परडी और वलसाड में उनकी जनसभाओं को ज़्यादा रिस्पॉन्स नहीं मिला.

जिन लोगों ने रैली में हिस्सा लिया उनमें से अधिकतर टिकट चाहने वाले हैं जो शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश में हैं लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री जिस तरह सभाएं कर रहे हैं उससे सब दिखता है.''

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किधर झुक रही है बीजेपी?

वलसाड में योगी के रोड शो के दौरान सड़कों पर बहुत कम लोग दिखे. फ़यसल बकीली कहते हैं कि ये दिलचस्प है कि वलसाड ने देश के शासक तय किए हैं.

उन्होंने कहा, ''बीते तीन दशकों से ऐसा हो रहा है कि जिस पार्टी का सांसद वलसाड से चुनाव जीतता है केंद्र में उसकी सरकार बनती है. अगर बीजेपी वलसाड में लड़खड़ाडी है तो उसके लिए यह चिंता की बात होगी.''

बकीली यह भी कहते हैं कि अगर बीजेपी अपने विकास कार्यों को सामने रखना चाहती है तो वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो उतार सकती थी जिन्होंने लंबे समय से अपने राज्यों में कुछ बेहतर काम किए हैं लेकिन बीजेपी ने योगी को उतारा और इससे साफ़ दिखता है कि वह किधर झुक रही है.

राजकोट के वरिष्ठ पत्रकार किरित सिंह ज़ाला कहते हैं, ''पहले चरण में, गुजरात गौरव यात्रा को सौराष्ट्र क्षेत्र में ज़्यादा अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली, जो कि उसका पारंपरिक वोट क्षेत्र है. यहां पार्टी को पाटीदारों के गुस्से का सामना करना पड़ा जो ओबीसी कैटेगरी में नौकरियों में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं. किसान भी फसल बीमा और नर्मदा के पानी को लेकर सरकार से नाराज़ हैं''

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बीजेपी का विरोध

ज़ाला ने यह भी कहा ''सौराष्ट्र क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों की वजह से बीजेपी की यात्रा कुछ गांवों में घुस भी नहीं पाई. बीजेपी के लिए सौराष्ट्र में यह अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि ये उसका पारंपरिक वोट बैंक रहा है.''

वह कहते हैं ''मुश्किल ये है कि ये वही पाटीदार हैं जिन्होंने नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल का जमकर गुणगान किया था और बीजेपी का वोट बैंक बढ़ाया था. अब, वे खुलेआम गुजरात मॉडल की आलोचना कर रहे हैं और 'गौरव यात्रा' को 'कौरव यात्रा' कह रहे हैं.''

राजनीतिक मामलों पर नज़र रखने वाले लोग कहते हैं कि जो बीजेपी पहले हमलावर रुख अपनाती थी अब वह बचाव के मोड में है और उन्हें हर हाल में मोदी के गुजरात मॉडल का बचाव करना ही है.

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