'पद्मावती को खिलजी की प्रेमिका बताना बर्दाश्त से बाहर'

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संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'पद्मावती' रिलीज से पहले विवादों में है. फ़िल्म के विरोध में प्रदर्शनों का दौर जारी है. इसकी रिलीज पर रोक लगाने के लिए विभिन्न राज्यों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म में महारानी पद्मवाती को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने कोशिश की जा रही है. रविवार को गांधीनगर में राजपूत समाज की बड़ी सभा बुलाई गई, जिसमें फ़िल्म पर बैन की मांग की गई.

इधर, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी फ़िल्म का विरोध किया है. उन्होंने फ़िल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से कथित तौर पर छेड़छाड़ करने पर निर्माताओं को माफ़ी मांगने को कहा है.

गांधीनगर की सभा राजपूत करणी सेना की तरफ़ से बुलाई गई थी. संस्थान के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा है कि इस फ़िल्म को राजपूत समाज किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा.

कालवी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "अगर 16 हजार स्त्रियों के साथ जौहर करने वाली पद्मवती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका दर्शाया जाएगा, ये बर्दाश्त कैसे किया जाएगा?"

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Image caption गांधीनगर में करणी सेना की सभा में जुटे राजपूत समाज के लोग

उन्होंने आगे कहा, "आज पूरे देश फ़िल्म को लेकर आक्रोश है. लोग फ़िल्म पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं. हमारे बुज़ुर्गों के ख़ून से इतिहास लिखा गया है. आज उसपर कालिख पोतने का प्रयास नहीं चलेगा."

करणी सेना इस महीने उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों में फ़िल्म के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेगी.

सिर्फ राजपूत समाज ही नहीं, राजनीतिक पार्टियां के प्रवक्ता भी अपने बयानों में फ़िल्म पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.

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'खिलजी क्रूर शासक'

भारतीय जनता पार्टी भी रानी पद्मावती को हिंदू और राजपूत समाज के स्वाभिमान का प्रतीक और अलाउद्दीन खिलजी को क्रूर शासक बता रही है.

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने बीबीसी से कहा, "फिल्म पद्मावती इतिहास आधारित फिल्म है. इसकी मुख्य किरदार हैं रानी पद्मावती. वो देश की राजपूत और हिंदू समाज में स्वाभिमान का प्रतीक हैं."

जीवीएल नरसिम्हा राव फ़िल्म की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीनिंग चाहते हैं. वो कहते हैं, "फ़िल्म में अलाउद्दीन खिलजी एक मुख्य किरदार हैं, जो एक अक्रांता हैं. सबसे क्रूर और बर्बरता करने वालों शासकों में अलाउद्दीन खिलजी का नाम शामिल है."

उन्होंने आगे कहा, "हमलोगों पर एक हज़ार साल तक विदेशियों ने शासन किया है. यह बर्बर शासन का दौर रहा. उन सभी में हिंदू धर्म को लेकर किसी न किसी तरह से असिहष्णुता का भाव था."

"उसी के कारण हिंदू मंदिरों को लगातार 11वीं से लेकर 18वीं शताब्दी तक शासकों ने तोड़ने और हिंदू समाज पर असहनीय कर लगाने की कोशिश की."

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कांग्रेस के सुर

कांग्रेस के सुर भी भाजपा से अलग नहीं है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का अधिकार किसी का नहीं है.

उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि अगर इस फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ हुआ है तो वो ग़लत है. करणी सेना को पहले फ़िल्म दिखाई जानी चाहिए उसके बाद रिलीज़ हो. आपत्तियां दूर होने के बाद ही इस फ़िल्म को रिलीज किया जाना चाहिए."

शक्ति सिंह गोहिल ख़ुद राजपूत समाज से आते हैं. इनसे पहले कांग्रेस के किसी नेता ने पद्मावती को लेकर खुलकर विरोध का इजहार नहीं किया था. गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में माना जा रहा है कि वो इस बयान से राजनीतिक फ़ायदा लेना चाहते हैं.

पिछले सप्ताह फ़िल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने एक वीडियो जारी कर फ़िल्म पर हो रहे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया था.

भंसाली ने कहा था, "मैं रानी पद्मावती की कहानी से हमेशा से प्रभावित रहा हूं. ये फ़िल्म उनकी वीरता और बलिदान को नमन करती है."

उन्होंने कहा, "कुछ अफ़वाहों की वजह से फ़िल्म विवादों में हैं. अफ़वाह है कि फ़िल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच प्रेम संबंध दिखाए गए हैं. मैं इस बात को पहले भी नकार चुका हूं. लिखित प्रमाण भी दिया है, एक बार फिर दोहरा रहा हूं कि हमारी फ़िल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच ऐसा कोई सीन नहीं है जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाए."

भंसाली ने कहा, "हमने इस फ़िल्म को बहुत ज़िम्मेदारी से बनाया है. राजपूत मान और मर्यादा का ख़्याल रखा है."

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