प्रेस रिव्यू: बेटे से अपने संबंधों पर बोले यशवंत सिन्हा

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जनसत्ता की एक ख़बर के मुताबिक बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली को गुजरात की जनता के लिए बोझ बताया है.

उन्होंने कहा कि जीएसटी और नोटबंदी में जैसी गड़बड़ियां हुई हैं उस आधार पर देशवासियों की यह मांग उचित होगी कि जेटली वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी छोड़ दें. सिन्हा ने कहा कि वित्त मंत्री केवल एक व्यवस्था में भरोसा करते हैं कि चित भी मेरी और पट्ट भी मेरी.

यशवंत सिन्हा ने द हिन्दू को एक इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में सिन्हा से पूछा गया कि आप अपने बेटे जयंत सिन्हा से मतभेदों को लेकर भी प्रसिद्ध हो गए हैं. इसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब में यशवंत सिन्हा ने कहा, ''मैं चंद्रशेखर, आडवाणी, वाजपेयी और यहां तक कि अपने प्रेरणास्रोत जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक विस्तार में पला बढ़ा हूं. हमारे लिए निजी संबंध और राजनीतिक संबंध में फ़र्क़ होता है. आप गंभीर राजनीतिक मतभेद के बावजूद एक अच्छे दोस्त हो सकते हैं. मेरी लिए यही बात परिवार में भी लागू होती है.''

'वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा' पर नहीं था बीजेपी को भरोसा

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तो यशवंत सिन्हा का अरुण जेटली से राजनीतिक मतभेद है पर निजी संबंध अच्छे हैं? इस पर सिन्हा ने कहा, ''उनसे मेरा बेहतरीन संबंध रहा है. यहां तक कि उनके वित्त मंत्री बनने के बाद मुलाक़ातें भी हुईं. हमलोग का वाजपेयी सरकार में भी मंत्री के रूप में राजनीतिक मतभेद था. हालांकि यह सच है कि बाद में उनसे कोई संवाद नहीं हुआ.'' सिन्हा ने इस इंटरव्यू में कहा कि वो भारतीय जनता पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं इसलिए सवाल उठा रहे हैं.

'द हिन्दू' अख़बार ने पहले पन्ने पर सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले को लीड ख़बर बनाया है. अख़बार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज रिश्वत मामले में वक़ील कामिनी जायसवाल की एसआईटी जांच की याचिका को ख़ारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका बिना आधार के दायर की गई है और बिना मतलब न्यापालिका को संदेह के घेरे में लेने की कोशिश की गई है.

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अख़बार के अनुसार कोर्ट ने कहा कि यह अदालत की अवमानना का मामला बनता है, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में इस तरह की याचिका दायर नहीं होगी. यह कहकर सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से याचिकाकर्ता कामिनी जायसवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई से इनकार कर दिया.

अख़बार के अनुसार निपटारे के लिए रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील ख़ारिज करते हुए कहा कि सीबीआई की एफ़आईआर में किसी जज का नाम नहीं है. एफ़आईआर में दर्ज़ कथित रिश्वतखोरी से सुप्रीम कोर्ट के किसी जज का कोई संबंध नहीं है क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित ही नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि याचिका में लगातार कोशिश की गई कि एक जज बेंच में न रहें. यह एक तरह से फोरम शॉपिंग है, जो अनैतिक और ग़ैरज़रूरी थी. इस याचिका से पूरे सिस्टम को परेशान किया गया. अख़बार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की बेंच ने कहा, ''यह अनुचित है कि याचिकाकर्ता हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए अपनी याचिका में कह रहा है कि मुख्य न्यायाधीश को नहीं सुनना चाहिए.

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इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस ख़बर को पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापा है. अख़बार की मुताबिक़ तीन जजों की इस बेंच ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास यह अधिकार है कि वो सुनवाई की ज़िम्मेदारी किस बेंच को सौंपते हैं. बेंच ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भले उन पर कोई आरोप क्यों न हो लेकिन मुख्य न्यायाधीश के इस अधिकार पर आरोप से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

नवभारत टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत के लिए अयोध्या को चुना है. उन्होंने कहा कि भगवान राम के बगैर देश में कोई काम नहीं हो सकता, राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं. योगी ने कहा कि देश की पूरी आस्था के केंद्र बिंदु भगवान राम हैं.

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मुख्यमंत्री ने भाषण की शुरुआत 'जय श्रीराम' के साथ करते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने अयोध्या के गौरव के साथ भेदभाव किया, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हमारे यहां आने से सपा और बसपा को बुरा लगता है. ऐसा लगता है कि इनके शरीर में करंट छू गया है. जनता से मेरी अपील है कि अयोध्या की पहचान से भेदभाव करने वालों को कभी माफ न करें.

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