अयोध्या में मंदिर बने, मस्जिद कहीं और बन जाए: शिया वक़्फ़ बोर्ड

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Image caption धर्मगुरू श्री-श्री रविशंकर का कहना है कि वो अयोध्या विवाद में मध्यस्थता कर रहे हैं

भारत के सबसे बड़े विवाद बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का यूपी के सेंट्रल शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी के पास आसान हल है. वसीम रिज़वी चाहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बने और मस्जिद अयोध्या और फ़ैज़ाबाद से बाहर कहीं और बन जाए.

वसीम रिज़वी बार-बार इसे लेकर बयान देते हैं और हर बार उनके बयान मीडिया में सुर्ख़िया बनते हैं. लेकिन क्या अयोध्या विवाद का हल इतना सरल है और क्या वसीम रिज़वी के बयान का अदालत में चल रहे मामले और पक्षकारों के बीच हो रही वार्ता में कोई महत्व है?

वसीम रिज़वी दावा करते हैं कि बाबरी मस्जिद मीर बाक़ी ने बनवाई थी और इसके आख़िरी मुतवल्ली शिया मुसलमान थे, लिहाज़ा ये शिया संपत्ति है और शिया वक़्फ़ बोर्ड के पास उसके बारे में फ़ैसला लेने का हक़ है.

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Image caption हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था

शिया बोर्ड ने पहले कभी पक्ष नहीं रखा

वहीं बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमेटी से जुड़े अधिवक्ता जफ़रयाब जिलानी कहते हैं, "क़ानूनी तौर पर वसीम रिज़वी के बयानों का कोई महत्व नहीं हैं. 1945 में शिया वक़्फ़ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के शिया वक़्फ़ संपत्ति होने का दावा किया था जिसे 1946 में फ़ैज़ाबाद के सिविल जज ने ख़ारिज कर दिया था और मस्जिद को सुन्नी मस्जिद बताया था."

जफ़रयाब कहते हैं, "शिया वक़्फ़ बोर्ड को 1989 में हाई कोर्ट में दायर मुक़दमा नंबर पांच में एक पक्ष बनाया गया था, लेकिन उसके बाद से उन्होंने न ही कभी कोई जवाब दाख़िल किया और न ही अदालत में कभी दावा पेश किया. साल 2010 में बाबरी मस्जिद को लेकर फ़ैसला आ गया तब तक उन्होंने हाई कोर्ट में कुछ भी नहीं किया क्योंकि शिया वक़्फ़ बोर्ड मान रहा था कि इस मुक़दमे से उनका संबंध नहीं है."

जफ़रयाब कहते हैं, "सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में न ही वो याचिकाकर्ता हैं और न ही प्रतिवादी हैं. वो एक पक्ष तो हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में उनका कोई दावा नहीं है. मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट उनके दावों पर सुनवाई नहीं करेगा."

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तो फिर अब यूपी का शिया वक़्फ़ बोर्ड अचानक बाबरी मस्जिद विवाद में सक्रिय क्यों हो गया है? इस सवाल पर वसीम रिज़वी कहते हैं, "21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले को आपस में तय कर लिया जाए. मैंने इस मामले में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड से कई बार बात की, लेकिन जब वो तैयार नहीं हुए तब हमें ये कहना पड़ा कि ये संपत्ति तुम्हारी नहीं है, तय करने का हक़ हमें है और अब हम तय करेंगे."

वसीम कहते हैं, "हमने तय किया है कि अयोध्या-फ़ैज़ाबाद में मस्जिद नहीं बननी चाहिए, मस्जिद मुस्लिम बहुल क्षेत्र में वहां से दूर हटकर बन जाए. विवादित जगह पर हिंदू अपना मंदिर बना लें."

वसीम आगे कहते हैं, "वहां मस्जिद थी, मीर बाक़ी ने बनाई थी, लेकिन जहां फ़साद हो, दो हज़ार से ज़्यादा लोग जिस विवाद में मारे जा चुके हों, हम उस फ़साद को ख़त्म करना चाहते हैं. हम वहां झगड़ा नहीं चाहते. जो ख़ून ख़राबे की जगह हो, शिया मसलक के हिसाब से ऐसी जगह इबादत सही नहीं है."

वसीम कहते हैं, "अब मस्जिद वहां मौजूद नहीं है. जिस नई मस्जिद को बनाने की बात हो रही है, इंसानियत का सबूत देते हुए और विवाद को ख़त्म करने के लिए हम उसे कहीं और बनाना चाहते हैं. मेरे लिहाज़ से ये शरियत के हिसाब से भी सही है."

शिया बाबरी मस्जिद के साथ

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Image caption ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े यासूब अब्बास कहते हैं बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर शिया मुसलमान सुन्नी मुसलमानों के साथ हैं

शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड एक सरकारी संस्था है जो यूपी में शिया समुदाय से जुड़ी सार्वजनिक संपत्तियों की देखभाल करती है, लेकिन क्या शिया वक़्फ़ बोर्ड शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है?

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े यासूब अब्बास कहते हैं, "शिया वक़्फ़ बोर्ड सरकारी संस्था है और उसके बयान पर हम टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का पक्ष बिलकुल स्पष्ट है. बाबरी मस्जिद विवाद में हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी मस्जिद समिति के साथ हैं. हम हमेशा से उनके साथ रहे हैं."

अब्बास कहते हैं, "बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर जो आम मुसलमानों की आवाज़ है वही शिया पर्सनल लॉ बोर्ड और शिया मुसलमानों की आवाज़ भी है."

अब्बास कहते हैं, "हम बाबर के ख़िलाफ़ हो सकते हैं, औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ हो सकते हैं, मुग़ल बादशाहों के ख़िलाफ़ हो सकते हैं, लेकिन मस्जिद के मुद्दे पर हम मस्जिद के साथ हैं. "

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रिज़वी को गंभीरता से नहीं लेते

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Image caption अयोध्या विवाद के मुद्दई हाशिम अंसारी की मौत के बाद अब उनके बेटे इक़बाल अंसारी इस मामले में मुसलमानों की ओर से पक्षकार हैं

वहीं मुस्लिम समुदाय की ओर से बाबरी मस्जिद विवाद में प्रमुख पक्षकार रहे हाशिम अंसारी के बेटे इक़बाल अंसारी कहते हैं कि वसीम रिज़वी को कोई गंभीरता से नहीं लेता है, उनकी बात को कोई नहीं सुनेगा.

अंसारी कहते हैं, "वो हिंदू मुसलमानों और शिया-सुन्नी के बीच नफ़रत फैलाने की बातें कर रहे हैं. बाबरी मस्जिद का मुद्दा एक बड़ा मुद्दा है, लोग इससे राजनीति करते हैं. जब भी चुनाव आता है तमाम तरह के लोग चले आते हैं और मंदिर बनाने के नाम पर वोट मांग लेते हैं. यहां कोई भी मुद्दे के समाधान के लिए नहीं आता है बल्कि सब राजनीति करने आते हैं."

अंसारी कहते हैं, "मामला सुप्रीम कोर्ट में है. आपसी सुलह-समझौते की बात भी हुई है. लेकिन समझौता तब होता है जब दोनों पक्ष थोड़ा-थोड़ा पीछे हटते हैं, लेकिन वसीम रिज़वी तो लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात करते हैं जो हमें स्वीकार नहीं है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है और अब जो अदालत तय करेगी वही होगा."

अंसारी कहते हैं, "ये विवाद 70 साल से चल रहा है, अब तक ये कहां थे? इन्हें शिया-सुन्नी में विवाद को भड़काने के लिए लाया गया है. ये अयोध्या आते हैं तो मुसलमान पक्ष से बात नहीं करते हैं बल्कि चुपचाप कुछ लोगों से मिलकर चले जाते हैं. "

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