मणिशंकर अय्यर के घर हुई कथित 'गुप्त' बैठक का सच!

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गुजरात की राजनीति में रविवार का दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सनसनीख़ेज़ आरोप के नाम रहा, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और पाकिस्तान के पूर्व अधिकारियों के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस से निष्कासित मणिशंकर अय्यर के घर कुछ ही दिन पहले एक बैठक हुई थी, जिसमें पाकिस्तान के उच्चायुक्त, पूर्व विदेश मंत्री, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी मौजूद थे.

रविवार को बनासकांठा के पालनपुर की एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान गुजरात चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर हस्तक्षेप कर रहा है और पाकिस्तान के एक पूर्व अधिकारी चाहते हैं कि कांग्रेस नेता अहमद पटेल गुजरात के अगले मुख्यमंत्री बनें.

बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र ने वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शंकर झा से बात की, जिनका दावा है कि वह मणिशंकर अय्यर के घर पर हुई इस बैठक में शामिल थे. झा का दावा है कि इस बातचीत में गुजरात या अहमद पटेल का ज़िक्र तक नहीं हुआ.

कब हुई यह बैठक और किसने बुलाई?

प्रेम शंकर झा ने बताया कि यह बैठक 6 दिसंबर को हुई थी और करीब तीन घंटे तक चली. इस बैठक में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी मौजूद थे.

प्रेम शंकर झा के मुताबिक, ''यह एक निजी मुलाक़ात थी. कसूरी साहब और मणिशंकर अय्यर पुराने दोस्त हैं. इस बैठक में भारत-पाक रिश्तों को कैसे बेहतर किया जाए, इस पर बात हुई थी.''

''कसूरी साहब थोड़ी देर से पहुंचे, उनके पहुंचने के बाद हमने खाना खाया. खाना खाने से लगभग डेढ़ घंटे पहले कुछ बातचीत हुई, फिर खाने के दौरान भी इतनी ही देर तक बातें हुई.''

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Image caption पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद कसूरी

किस मुद्दे पर हुई बातचीत?

कांग्रेसी नेताओं और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच इस बैठक में क्या बातें हुईं, इसे लेकर प्रधानमंत्री ने सवाल उठाए हैं.

इस बारे में प्रेम शंकर झा ने बताया, ''भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर बात हुई. साथ ही कश्मीर की समस्या पर भी बात हुई. दोनों मुल्कों के रिश्तों में कश्मीर समस्या सबसे बड़ा रोड़ा है. तो यही बात हुई कि इस समस्या को सुलझाने के क्या और तरीके हो सकते हैं.''

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क्या गुजरात के बारे में बात हुई?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आरोप लगाया है कि इस बैठक में गुजरात चुनाव के सिलसिले में बातचीत हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना के पूर्व डायरेक्टर जनरल सरदार अरशद रफ़ीक़ ने अहमद पटेल को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

इस पर प्रेम शंकर झा ने बताया कि इस बैठक में गुजरात पर कोई चर्चा नहीं हुई.

उन्होंने कहा, ''इस बैठक में गुजरात चुनाव का कोई जिक्र ही नहीं हुआ, यहां तक कि बैठक में गुजरात का नाम तक नहीं लिया गया.''

प्रेम शंकर झा ने यह दावा भी किया कि इस बैठक में अहमद पटेल का कोई नाम नहीं लिया गया.

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Image caption अहमद पटेल

कौन-कौन मौजूद थे बैठक में?

प्रेम शंकर झा ने बताया, ''इस बैठक में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूद थे. मैं चूंकि कश्मीर मसले पर लिखता रहा हूं और मणिशंकर अय्यर का मित्र भी हूं, इसलिए उन्होंने मुझे भी बुलाया था. हम लोग मिले थे तो हम लोग देशद्रोही हो गए क्या? मुलाक़ात करना देशद्रोह हो गया है क्या?''

प्रेम शंकर झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और उनकी कश्मीर मसले पर वह किताब भी लिख चुके हैं. उन्होंने बताया कि वे पिछले 29 साल से कश्मीर के मुद्दे पर लिख रहे हैं.

प्रेम शंकर झा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के सूचना सलाहकार भी रह चुके हैं.

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Image caption पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी (बाएं) और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

पीएम मोदी को इस बैठक की जानकारी कैसे हुई?

इस बैठक पर भाजपा ने यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को क्यों नहीं दी गई थी. इस पर प्रेम शंकर झा ने कहा कि इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं थी.

उन्होंने कहा, ''कसूरी साहब और मणिशंकर अय्यर कॉलेज के दिनों के दोस्त हैं. दोनों के पास कोई आधिकारिक पद नहीं हैं. हम लोग देश के आम नागरिक हैं और किसी से भी मिलना हमारा हक़ है, किसी से मिलना क्या कोई ज़ुर्म है? ''

जब उनसे पूछा गया कि आपकी राय में प्रधानमंत्री मोदी को इस बैठक की जानकारी कैसे हुई, तो प्रेम कुमार झा ने कहा, ''इसमें छिपाने वाली बात ही क्या है. मैंने बाहर जब गाड़ी रोकी थी तो बीसियों लोग बाहर थे. हमें कम से कम छह ईमेल आए, दो-तीन दफा हमने फोन पर भी बातचीत की. ये लोग मणिशंकर अय्यर की एक-एक बात सुनते हैं.''

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Image caption मणिशंकर अय्यर

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री कसूरी की मौजूदगी पर उन्होंने कहा, ''कसूरी साहब भारत आते रहते हैं. दो साल पहले कसौली लिटरेचर फेस्टिवल में उनकी किताब का विमोचन हुआ था, तब भी आए थे. भारत सरकार उन्हें वीज़ा देती है. अगर वे चाहते हैं कि उनसे हम न मिलें तो उन्हें वीज़ा क्यों देते हैं.''

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