बेहद हंगामेदार हो सकता है शीतकालीन सत्र

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शुक्रवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है. उम्मीद की जा रही है गुजरात चुनाव प्रचार में तीखे तेवर अपना चुकी विपक्ष संसद में भी हमलावर तेवर अपना सकती है.

जीएसटी, नोटबंदी, अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़े विषय समेत कई समसामयिक मुद्दों पर घेरने का प्रयास किया जा सकता है. उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर भी दोनों सदनों में चर्चा की कोशिश करेगा.

शीतकालीन सत्र में कुल 14 बैठकें होंगी और यह सत्र 22 दिन यानी 5 जनवरी तक चलेगा.

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Image caption कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्त चरण दास

किन मुद्दों पर विपक्ष घेरेगा

कयास लगाए जा रहा है कि इस सत्र में सरकार और विपक्ष मंदिर मुद्दे पर आपस में टकराएंगे. संसद सत्र के दौरान ही 18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा के नतीजे भी आएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य होने की वजह से चुनाव के नतीजों का असर सत्र पर देखा जा सकता है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्त चरण दास कहते हैं, "पिछले दिनों सरकार मुद्दों से बार-बार भाग रही है. सरकार मुद्दों से भागकर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. महंगाई दर बढ़ रही है. जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री मननमोहन सिंह ने कहा था कि नोटबंदी से जीडीपी दो फीसदी तक कम हो जाएगी, ऐसा हो गया है."

"इंडस्ट्रियल ग्रोथ का हाल भी बुरा है, पिछले साल ये 4 फ़ीसदी के आसपास था तो इस साल ये दो फ़ीसदी के आसपास है. साथ ही बेरोज़गरी की समस्या भी बढ़ी है. सीमा की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी हैं. सभी मुद्दों पर सत्र में बात होगी."

वहीं भाजपा का कहना है कि वो इस सत्र के लिए पूरी तरह से तैयार है और चाहती है कि सकारात्मक चर्चा हो. संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि संसद चर्चा का सर्वोच्च स्थान है और सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है.

वो कहते हैं, "सरकार गरीब हितैषी है. विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए और नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए."

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Image caption भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल

विपक्ष बिल पास करने में मदद करे

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है "हम चाहते हैं कि संसद में मुद्दे आए और चर्चा हो. हम चाहते हैं कि विपक्ष विधायिका से संबंधित काम जैसे कि बिल वगैरह पास करने के काम में विपक्ष सरकार से बात करे और मदद करे."

ऋण शोधन और दिवाला संहिता (इन्सालवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) संशोधन विधेयक और वस्तु एवं सेवा कर (मुआवजा) अध्यादेश पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए हम तैयार हैं.

बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के डूबे हुए पैसों के निस्तारण के लिए तैयार विधेयक फ़ाइनेंसियल रिजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (एफ़आरडीआई) बिल सरकार की तरफ से पेश होने वाले बिलों में सबसे अहम है. जानकार मानते हैं कि इस पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकती है.

गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं, "ये बिल बैंकिंग व्यवस्था को मज़बूती देने के लिए है. इसमें इंश्योंरेंस डिपोज़िटर के इंश्योरेंस के लेवल में सरकार कोई बदलाव नहीं कर रही. इस पर बहस तभी होगी जब फ़ाइनेन्शियल स्टैंडिंग कमिटी इस पर मसौदा पेश करेगा. इसमें डिपॉज़िटर के पैसों को ले लेने से संबंधित कोई प्रावधान नहीं है. "

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तीन तलाक़ भी इसी सत्र में

लेकिन इस बिल को ले कर डर का माहौल पैदा हो रहा है और कुछ राजनीतिक पार्टियां इसे बिल को ख़तरनाक बता रही हैं. गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं, "इसे लेकर सोशल मीडिया में भ्रम का माहौल फैलाया जा रहा है."

भाजपा सरकार की कोशिश होगी कि तीन तलाक से संबंधित बिल भी इसी सत्र में पेश कर उसे पारित कराया जाए. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी पहले ही इसके संकेत दे चुके हैं.

कांग्रेस बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार पर रफ़ाएल समझौते में घोटाले का आरोप लगाती आई है. ऐसे में यह मुद्दा भी संसद में भी गरमा सकता है.

अर्थव्यवस्था की स्थिति, जीडीपी वृद्धि दर एवं अन्य आर्थिक मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार पर निशाना साध सकता है. लिहाजा सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं.

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कौन-कौन से विधेयकों पर है नज़र?

शीतकालीन सत्र के दौरान कई विधेयकों को लाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

  • वस्तु एवं सेवा कर (मुआवजा) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर संशोधन विधेयक लाने का प्रस्ताव है. यह अध्यादेश 2 सितंबर 2017 को जारी किया गया था.
  • ऋण शोधन और दिवाला संहिता (इन्सालवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) संशोधन विधेयक और भारतीय वन संशोधन विधेयक भी सरकार के एजेंडे में हैं.
  • बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के डूबे हुए पैसों के सुचारु निवारण के लिए तैयार विधेयक फाइनेंसियल रिजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल.
  • तीन तलाक से संबंधित बिल.
  • हाल में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा था कि अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़ा 123वां संशोधन बिल भी इसी सत्र में पेश होगा.
  • नागरिकता संशोधन विधेयक 2016, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2016, ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक भी पेश किया जा सकता है.
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2016 में कैसा रहा था शीतकालीन सत्र?

2016 में शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर को समाप्त हो गया था. इस बार सदन के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक पार्टियों के बीच आपसी कलह देखने को मिली.

साथ ही ये भी देखा गया कि किसी दल ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस करने, उस पर चर्चा करने या फिर समस्या के हल निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

सरकार भी दोनों सदनों की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में असमर्थ रही.

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क्या कहते हैं विश्लेषक?

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन मिश्रा कहते हैं कि जो सत्र शुरू हो रहा है उसक कितनी प्रासंगिकता बची रह गई है और कितना विधाई काम हो सकेगा ये चिंता का विषय है. सत्र के बीच में बड़े दिन की छुट्टियां शुरू हो जाएंगी और कुल मिला कर बस बीस दिन का ही सत्र है.

वो कहते हैं, "दोनों पार्टियों (कांग्रेस और भाजपा) का जो मूड है उसमें इस सत्र की प्राथमिकता किसी को नहीं लग रही है. चुनावों के चलते दोनों पार्टियों को मुद्दों की तलाश थी और ऐसा लगता है कि संसद की चिंता से दोनों ही मुक्त हैं."

वो कहते हैं कि कई बिल ऐसे हैं जिन पर कायदे से चर्चा होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया, कई बिल भी पेश होने हैं जिन पर चर्चा हो तो अच्छा है.

वो कहते हैं, "बहुत विपक्षी दबाव में ये कर्मकांड जैसा हो कर रह जाएगा, सत्र बुला भी लिया गया और उसके बाद जल्दी-जल्दी उसको समाप्त किया जाएगा."

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