कश्मीरः निक़ाह करने पर स्कूल के शिक्षकों को निकाला

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भारत प्रशासित कश्मीर में एक निजी स्कूल ने एक शिक्षक जोड़े को इसलिए नौकरी से बर्ख़ास्त कर दिया क्योंकि दोनों ने शादी कर ली थी.

पुलवामा ज़िले के पंपोर इलाके में स्थित मुस्लिम एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ने दलील दी है कि इससे शिक्षण संस्थान की बदनामी हुई है.

निकाले गए शिक्षक स्कूल प्रशासन पर कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं. लेकिन स्कूल के चेयरमैन जीएम बट ने इस फैसले को सही ठहराया है.

शिक्षा बोर्ड मामले की जांच कर रहा है और राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्कूल से रिपोर्ट तलब की है.

30 वर्ष के तारिक़ अहमद बट और समाया जान बीते कई साल से पढ़ा रहे थे.

ये संस्थान इलाक़े के बड़े स्कूलों में से एक है, जहां दो अलग अलग विंग में क़रीब 2000 लड़के लड़कियां पढ़ते हैं.

तारिक़ लड़कों के, जबकि समाया लड़कियों के विंग में पढ़ा रहे थे.

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

'प्रशासन को पहले से पता था'

तारिक़ और समाया श्रीनगर से क़रीब चालीस किलोमीटर दूर दक्षिणी कश्मीर के त्राल के रहने वाले हैं. इन दोनों के घर पड़ोस में हैं.

स्कूल प्रशासन का आरोप है कि शादी से स्कूल में इन दोनों की गतिविधियां ऐसी थीं, जिनसे स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों पर बुरा असर हो रहा था.

हालांकि तारिक़ इन आरोपों से इंकार करते हैं. तारिक़ के मुताबिक उनकी मंगनी के बारे में स्कूल प्रशासन कई महीने पहले से जानता था.

तारिक़ का कहना है, "हमने लव मैरिज़ नहीं की है, बल्कि हमारी शादी घरवालों ने तय की थी."

उन्होंने बताया, "मेरी पत्नी मुस्लिम एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में वर्ष 2010 से काम कर रही थीं और मैं साल 2013 से. छह महीने पहले हमारी मंगनी हुई. उसके बाद जब हम स्कूल गए तो हमने स्कूल प्रशासन को पार्टी दी."

तारिक़ के मुताबिक, उनकी शादी के लिए 30 नवंबर की तारीख तय हुई. उन्हें शादी के लिए स्कूल से एक महीने की छुट्टी मिली.

वो आगे बताते हैं, "जिस दिन हमारी शादी थी, उस दिन प्रिंसपल का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि आप कल से स्कूल नहीं आएंगे. अब आप की यहां ज़रूरत नहीं है क्योंकि आपकी वजह से हमारा स्कूल बदनाम हो गया."

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निकाह के दिन आया फ़ोन

तारिक़ के मुताबिक, प्रिंसपल ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और उनकी पत्नी को भी फ़ोन करके यही कहा.

वो कहते हैं, "उस समय हमारे घर में कई मेहमान थे, लेकिन इस ख़बर के बाद किसी ने भी यहां खाना नहीं खाया."

तारिक़ बताते हैं कि शादी के दो दिन बाद वो स्कूल गए और अपनी ग़लती के बारे में पूछा.

वो कहते हैं, "स्कूल प्रशासन का सिर्फ यही जवाब था कि आपकी वजह से स्कूल की बदनामी हुई है. आपका अफ़ेयर चल रहा था और हमारे बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ेगा."

तारिक़ का आरोप है कि स्कूल में उनके साथ 'ग़लत व्यवहार' किया गया और उन्हें 'ग़लत भाषा' में बात की गई.

इस स्कूल में लड़कियों और लड़कों को अलग-अलग पढ़ाया जाता है. समाया लड़कियों के विंग में पढ़ाती थीं और तारिक़ लड़कों के विंग में पढ़ाते थे.

स्कूल के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई के सवाल पर तारिक़ कहते हैं कि वो स्कूल वापस नहीं जाना चाहते लेकिन कानूनी कार्रवाई जरूर करेंगे.

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कोर्ट में जाने की तैयारी

वो कहते हैं, "हमारी इज़्ज़त पर जो दाग लगा है, मैं उसको मिटाना चाहता हूं. मैं अदालत में जाने के लिए तैयार हूं."

तारिक़ का आरोप है कि स्कूल में जब किसी 'अपने' को नौकरी देनी होती है तो प्रशासन ऐसे बहाने तलाशता है.

स्कूल के चेयरमैन जीएम बट ने कहा, "इस मामले में डायरेक्टर एजुकेशन ने दोनों पक्षों को तलब किया है. अंतिम फैसला लिए जाने के बाद हम मीडिया के साथ अपना पक्ष साझा कर सकते हैं. लेकिन अभी तक स्कूल प्रशासन का निर्णय दुरुस्त लगता है. हमारा स्कूल कश्मीर का बहुत बड़ा स्कूल है, जहां दो हज़ार छात्र पढ़ते हैं. इसलिए स्कूल के अंदर नियमों का खास ख्याल रखा जाता है."

राज्य के मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेकर आगामी सोमवार तक स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर एजुकेशन कश्मीर जोन रिपोर्ट तलब की है.

आयोग ने प्रिंसिपल से पेश होने के लिए भी कहा है.

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