'तमिलनाडु में तीन महीने में गिर जाएगी सरकार'

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टीटीवी दिनाकरण ने तमिलनाडु की आरके नगर विधानसभा सीट जीत ली है.

उन्होंने एआईएडीएम के उम्मीदवार ई मधुसूदन को 40 हज़ार 707 वोटों के अंतर से मात दी.

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयलिलता के निधन की वजह से ये सीट खाली हुई थी.

जयललिता की करीबी रहीं शशिकला के भतीजे दिनाकरण इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे.

चुनाव नतीजों से राजनीतिक विश्लेषक कुछ हद तक हैरान हैं.

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डीएमके उम्मीदवार की ज़मानत जब्त

डीएमके उम्मीदवार एनएम गणेश को 24 हज़ार वोट मिले और वो अपनी ज़मानत भी नहीं बचा सके.

दिनाकरण ने पहले ही राउंड से बढ़त बना ली थी. उन्होंने 89 हज़ार 13 वोट हासिल किए जो कुल पड़े एक लाख 76 हज़ार 890 वोटों के पचास फ़ीसदी से अधिक है.

दिनाकरण ने पत्रकारों से कहा, "आरके नगर के मतदाताओं ने अम्मा (जयललिता) के असली वारिस को चुना है. हमारा विश्वास है कि ये सरकार अगले तीन महीनों में (गिर) जाएगी."

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Image caption ई पलानीस्वामी

फ़ैसले का इंतज़ार

तमिलनाडु की एआईएडीएम सरकार के सामने उठते सवालों को उपचुनाव के नतीजे और तीखा कर सकते हैं. कई विश्लेषकों की राय है कि जनता ई पलानीस्वामी और ओ पनीरसेल्वम की सरकार से खुश नहीं है.

जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके में फूट पड़ गई थी और कई महीनों के बाद शशिकला और दिनाकरण का गुट अलग हो गया था.

बदली परिस्थितियों में डीएमके का राजनीतिक महत्व बढ़ने का आकलन किया जा रहा था लेकिन रविवार के नतीजों का पार्टी पर क्या असर होगा, इस सवाल पर डीएमके प्रवक्ता एम षणमुगम ने कहा, " चुनाव परिणाम से हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं होगा. हम हाईकोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं जो अगले महीने आना है. इस फ़ैसले से जानकारी होगी कि एआईएडीएम के को सरकार चलाने का अधिकार है या नहीं. हम इतना कह सकते हैं कि तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ जाएगी."

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Image caption ओ पनीरसेल्वम

दिनाकरण नहीं चाहेंगे गिरे सरकार

राजनीतिक विश्लेषक और चेन्नई के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के डॉयरेक्टर एन सत्यमूर्ति भी कहते हैं कि तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरिता बढ़ सकती है.

वो कहते हैं, "इतना साफ है कि एआईएडीएम के में अस्थिरिता की स्थिति होगी. चुनाव परिणाम के बाद बहुत सारी उलझन तो होगी ही. क्या इसके बाद सारे गुट साथ में आएंगे या फिर अलग होंगे, ये बताना अभी मुश्किल है. दिनाकरण का गुट भी ये नहीं चाहेगा कि सरकार गिरे."

चुनाव नतीजों के ऐलान के बाद जिस तरह से सत्ताधारी विधायकों की प्रतिक्रियाएं आईं हैं, उससे भी लगता है कि राजनीतिक उलझन की स्थिति बनी हुई है.

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