चर्च में कैसे-कैसे गुनाह कबूल कर रहे हैं लोग?

चर्च

"फ़ादर, मुझे एक शादीशुदा शख़्स से प्यार हो गया है. मैं उसके बिना नहीं रह सकती लेकिन लगता है कि मैं ग़लत कर रही हूं."

"फ़ादर, मेरे मन में अपने बॉस के लिए कड़वाहट बढ़ती ही जा रही है. दिल करता है उसे थप्पड़ लगा दूं."

फ़ादर लॉरेन्स इन दिनों लोगों के ऐसे न जाने कितने 'कन्फ़ेशन' सुन रहे हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

दिल्ली का 'सैक्रेड हार्ट कैथेड्रल' वैसे तो शहर के सबसे ख़ूबसूरत और शानदार गिरिजाघरों में से एक है, लेकिन इन दिनों इसकी रौनक में जैसे चार चांद लग गए हैं.

क्रिसमस ने दस्तक दी है और इसलिए ये अपने शबाब पर है. भीड़ भी रोज के मुकाबले ज्यादा है. चर्च की इमारत पर जगह-जगह चमकते सितारे और खनखनाती घंटियों की आवाज़ यहां आने वाले लोगों की आवाज़ों में घुलमिल रही है.

Image caption फ़ादर लॉरेन्स

यहां आने वालों में बहुत से लोग ऐसे हैं जो 'कन्फ़ेशन' के लिए आए हैं. 'कन्फ़ेशन' यानी अपने पापों या गुनाहों को स्वीकार करना.

अगर आपको 'ख़ामोशी' फ़िल्म का वो सीन याद है जिसमें मनीषा कोइराला और सलमान ख़ान 'कन्फ़ेशन' करने चर्च आते हैं तो आप समझ जाएंगे कि यहां किस बारे में बात हो रही है.

सात संस्कारों में से एक

'सैक्रेड हार्ट कैथेड्रल' के पादरी फ़ादर लॉरेन्स ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि 'कन्फ़ेशन' कैथोलिक चर्च के सात संस्कारों में से एक है. लॉरेन्स पिछले 16 साल से पादरी हैं.

उन्होंने कहा, "जब भी हम कोई ग़लत काम करते हैं, हमारा गॉड के साथ नाता टूट जाता है. ईश्वर के साथ दोबारा रिश्ता क़ायम करने के लिए हमें कन्फ़ेशन की ज़रूरत पड़ती है."

कन्फ़ेशन तभी किया जा सकता है जब आपको अपनी ग़लती का अहसास हो. किसी को डांट-डपटकर या जबरन कन्फ़ेशन नहीं कराया जा सकता. कन्फ़ेशन करने वाले की उम्र कम से कम 10 साल होनी चाहिए.

फ़ादर लॉरेन्स बताते हैं कि वैसे तो कन्फ़ेशन किसी भी वक़्त किया जा सकता है, लेकिन क्रिसमस के वक़्त गुनाह कबूल करने वालों की तादाद बढ़ जाती है.

साल के आख़िरी दिनों में लोग अपने पाप स्वीकार करके एक नई शुरुआत करना चाहते हैं. जिसे भी कन्फ़ेशन करना है वो पादरी से आकर बात करता है और पादरी उन्हें कन्फ़ेशन रूम में ले जाता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पादरी के सामने 'कन्फ़ेशन' करती एक महिला

कन्फ़ेशन की पहली और सबसे ख़ास बात ये है कि ये गोपनीय होता है. फ़ादर लॉरेन्स के मुताबिक, "कन्फ़ेशन के लिए आए व्यक्ति को भरोसे में लेना हमारी ज़िम्मेदारी है. किसी भी क़ीमत पर हम उनकी पहचान बाहर नहीं आने देते और न ही उनके बारे में किसी भी तरह की धारणा बनाते हैं.

70 साल बाद अलग अलग क्रिसमस मनाने को मजबूर

मुग़लों के समय कैसे मनाया जाता था क्रिसमस?

तो क्या अगर कोई पादरी के सामने किसी की हत्या का गुनाह कबूल करता है तो पादरी पुलिस को बता देगा?

इस सवाल पर फ़ादर लॉरेन्स 'नहीं' में जवाब देते हैं. उन्होंने कहा, "दुनिया में ऐसे भी पादरी हुए हैं जिन्होंने कन्फ़ेशन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए अपनी जान तक दी है. जो बात हमसे बताई जाती है वो 'कन्फ़ेशनल सील' में बंद हो जाती है और हम इसे कभी नहीं तोड़ सकते."

लोग किस-किस तरह के कन्फ़ेशन करते हैं और क्या इन दिनों कन्फ़ेशन्स के ट्रेंड में कोई बदलाव आया है?

फ़ादर लॉरेन्स बताते हैं कि कैथोलिक नियमों के मुताबिक आप जब भी कोई ग़लती करते हैं आपको पादरी के सामने इसे कन्फ़ेस करना होता है लेकिन आज की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में इतना मुमकिन नहीं है.

इसलिए आजकल लोग तभी कन्फ़ेशन के लिए आते हैं जब कोई बात वाकई उन्हें बहुत परेशान करती है.

युवाओं की संख्या अधिक

क्रिसमस से पहले पहले कन्फ़ेशन के लिए आने वालों में एक बड़ी संख्या युवाओं की होती है. फ़ादर लॉरेन्स ने बताया, "हमारे नौजवान ज़िंदगी में तमाम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. फिर चाहे वो दफ़्तर में हो या निजी ज़िंदगी में."

हवा में क्रिसमस मनाने पर चिढ़े पाकिस्तानी?

कभी इस्लामिक स्टेट का गढ़ रहे मोसुल में मना क्रिसमस

फ़ादर लॉरेन्स के मुताबिक युवा उनके पास कन्फ़ेशन के अलावा सलाह मांगने के लिए भी आते हैं. मसलन ऑफ़िस में किसी के साथ मनमुटाव या गर्लफ़्रेंड/ब्वॉयफ्रेंड के साथ होने वाले झगड़े भी वो हमसे शेयर करते हैं.

फ़ादर लॉरेन्स बताते हैं, "कैथोलिक नियमों के मुताबिक जीसस के अलावा किसी और ईश्वर की पूजा को ग़ुनाह माना जाता है. हमारे पास ऐसे कन्फ़ेशन भी आते हैं जिसमें लोग किसी और ईश्वर की पूजा करने के लिए माफ़ी मांगते हैं."

उन्होंने बताया कि कैथोलिक समुदाय में गर्भपात को बहुत बड़ा पाप माना जाता है इसलिए अबॉर्शन कराने वाले दंपति भी कन्फ़ेशन के लिए आते हैं.

धार्मिक और परंपराओं में यक़ीन करने वाले लोग अगर रविवार को चर्च नहीं आ पाते तो वो इसे भी ग़ुनाह मानते हैं और इस बारे में भी 'कन्फ़ेशन' करते हैं.

शादी से बाहर रिश्ते होने पर या पार्टनर के साथ वफ़ादार न रह पाने पर भी लोग कन्फ़ेशन के लिए आते हैं.

देखें: फ़िल्म 'ख़ामोशी' का कन्फ़ेशन वाला सीन

यानी चोरी, जलन और गुस्से से लेकर एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर तक, ऐसे तमाम मामलों में लोग कन्फ़ेशन या पाप स्वीकार करते हैं.

फ़ादर लॉरेन्स कहते हैं, "कन्फ़ेशन के वक़्त हम ग़लतियों को न दोहराने की क़सम भी खाते हैं और साथ ही बेहतर इंसान बनने की कोशिश करते हैं."

उन्होंने कहा कि लोग पादरियों के पास जाते ज़रूर हैं लोग माफ़ करने वाला तो भगवान ही है. पादरी उनकी बात सुनने और इसे गॉड तक पहुंचाने का ज़रिया भर हैं.

क्या दूसरे धर्मों के लोग भी कन्फ़ेशन के लिए चर्च आ सकते हैं? इसके जवाब में फ़ादर लॉरेन्स कहते हैं, "हां, बिल्कुल. अभी हाल ही में एक हिंदू लड़की मेरे पास आई थी. मैंने उसकी बात सुनी और उसे सलाह दी."

उन्होंने बताया कि पादरी दूसरे धर्मों के लोगों से परंपरागत तरीके से कन्फ़ेशन नहीं करवाते, लेकिन उनकी बात सुनते ज़रूर हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे