कश्मीर: मारा गया चार फुट का 'मौत का सौदागर'

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Image caption नूर मोहम्मद तांत्रे सिर्फ़ चार फुट दो इंच के थे.

भारतीय सुरक्षाबलों ने मंगलवार को चर्चित चरमपंथी नूर मोहम्मद तांत्रे को श्रीनगर के बाहर हुई एक मुठभेड़ में मार दिया.

नूर मोहम्मद तांत्रे पाकिस्तान से संचालित चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर थे.

पुलिस का कहना है कि लंबी चली मुठभेड़ के बाद तांत्रे को मारा गया है.

तांत्रे के पुलमवामा स्थित घर में दो अन्य चरमपंथियों के साथ होने की ख़ुफ़िया सूचना पुलिस को मिली थी.

तांत्रे को 2003 में गिरफ़्तार करने वाले एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक तांत्रे को उनके छोटे क़द की वजह से चरमपंथियों ने अपने समूह में शामिल किया था.

तांत्रे सिर्फ़ चार फुट दो इंच के थे. अधिकारी के मुताबिक, "किसी को भी उनके चरमपंथी होने का शक़ नहीं होता और इसी वजह से जैश-ए-मोहम्मद ने उन्हें ओवर ग्राउंड वर्कर के तौर पर भर्ती किया था."

लेकिन ये छोटा क़द ही उनकी पहचान भी बन गया और सुरक्षा बलों के लिए उन्हें पहचानना आसान हो गया.

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कौन थे नूर मोहम्मद तांत्रे?

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47 वर्षीय नूर मोहम्मद तांत्रे को एक मुक़दमे के दौरान 'मौत का सौदागर' कहा गया था.

तांत्रे 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के कथित मास्टरमाइंड और जैश के कमांडर गाज़ी बाबा के करीबी थे.

दिल्ली में जब उन्हें 2003 में गिरफ़्तार किया गया था तो उनके पास से बोरी भरकर नोट मिले थे.

उन्हें 2011 में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी लेकिन 2015 में वो पैरोल तोड़कर फरार हो गए थे.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक पैरोल से फरार होने के बाद से ही तांत्रे पुलिस के लिए सिर दर्द बन गए थे. उन्होंने मध्य कश्मीर क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद की कमान संभाल ली थी.

माना जाता है कि अक्तूबर में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास बीएसएफ़ कैंप पर हुए हमले के पीछे भी तांत्रे का ही दिमाग़ था.

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद्य के मुताबिक बेहद सटीक ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान में तांत्रे को मारा गया है.

उन्होंने कहा, "हालांकि जब तक सुरक्षा बलों ने घेराबंदी की, दो चरमपंथी भागने में कामयाब रहे जिन्हें पकड़ने के लिए क्षेत्र में खोजी अभियान चलाया जा रहा है."

वैद्य के मुताबिक तांत्रे श्रीनगर जम्मू हाइवे पर गाड़ियों के काफ़िले पर हमले की योजना बना रहे थे.

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में 1989 के बाद से हिंसक दौर आते जाते रहे हैं लेकिन जुलाई 2016 में चरमपंथी कमांडर बुरहान वानी की भारतीय सैन्य बलों के हाथों मौत के बाद से हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया है.

नूर मोहम्मद तांत्रे की मौत को क्षेत्र में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे सैन्य बलों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.

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