कागज पर यौन शोषण की आपबीती लिखकर मदरसे की छत से फेंका

मदरसे से छुड़ायी गयी लड़कियां इमेज कॉपीरइट ASIF/BBC

लखनऊ के एक मदरसे में लंबे समय से छात्राओं का यौन शोषण और उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप में मदरसा संचालक को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया है. छात्राओं की शिकायत पर पुलिस और प्रशासन की टीम ने शुक्रवार देर रात छापा मारकर 51 छात्राओं को मुक्त करवाया.

लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) विकास चंद्र त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया कि पीड़ित छात्राओं ने पत्र लिखकर मदरसे के संचालक कारी तैय्यब जिया पर यौन शोषण करने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत की थी.

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छात्रावास में देखभाल के लिए कोई महिला नहीं

पुलिस ने तैय्यब पर पॉस्को ऐक्ट समेत विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज करने के बाद गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया. एएसपी त्रिपाठी के मुताबिक छात्राओं का बयान दर्ज करने के बाद को कुछ को नारी निकेतन भेज दिया गया है जबकि कुछ के माता-पिता उन्हें घर ले गए.

विकास चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक़, "मदरसे में 125 छात्राएं पढ़ती हैं, लेकिन मौजूदा समय में 51 छात्राएं ही थीं, बाकी घर चली गई हैं. मदरसे में छात्राओं का एक हॉस्टल भी है लेकिन किसी तरह के नियम-क़ायदे का वहां पालन नहीं हो रहा था. यहां तक कि छात्रावास की देखभाल के लिए कोई महिला तक नियुक्त नहीं थी."

लखनऊ के सआदतगंज इलाक़े में स्थित इस मदरसे के संस्थापक इंदिरानगर निवासी सैयद मोहम्मद जिलानी अशरफ़ हैं.

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कागज के टुकड़े पर आपबीती लिखी

पुलिस के मुताबिक उन्होंने इसके संचालन की ज़िम्मेदारी कारी तैयब को दे रखी थी. सैयद मोहम्मद जिलानी ने मीडिया को बताया छात्राओं ने कागज के टुकड़े पर अपनी आपबीती लिखी और उसे मदरसे की छत से नीचे फेंक दिया. बताया जा रहा है कि कागज पाकर मोहल्ले वालों ने अशरफ को मामले की जानकारी दी.

पुलिस के मुताबिक उन्हें लड़कियों के पत्र भी मिले हैं और अशरफ़ ने भी शिकायत की थी. दोनों की सूचना पर ही छापेमारी की गई.

कागज में छात्राओं ने लिखा था कि तैयब जिया और उनके कुछ साथी उनका यौन शोषण करते थे, विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे. मदरसे के संस्थापक जिलानी ने इस जानकारी के बाद पुलिस को सूचना दी.

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पुलिस पर भी उठ रहे सवाल

हालांकि कुछ स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि मदरसे के अंदर क्या हो रहा था ये तो उन्हें नहीं पता लेकिन इस मामले की वजह संपत्ति विवाद भी हो सकती है. एक स्थानीय नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस को कई पत्र भले ही हाथ लगे हों लेकिन उन्हें लिखने वाली लड़कियां एक-दो ही हैं और उनसे ये जानबूझकर लिखवाया गया है.

इन पत्रों और पीड़ित छात्राओं के नाम सार्वजनिक करने को लेकर भी पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं पत्र में दिए गए एक छात्रा के मोबाइल नंबर पर जब बात करने की कोशिश की गई तो उसे किसी पुरुष ने उठाया और फिर फ़ोन काट दिया.

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