'पश्चिम बंगाल की सरकार में मतभेद'

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के लालगढ़ इलाक़े में हो रही हिंसा की रोकथाम के लिए कार्रवाई करने के बारे में राज्य सरकार में मतभेद हैं.

Image caption पी चिदंबरम ने कहा की केंद्र पश्चिम बंगाल की सरकार को पूरा सहयोग देने को तैयार है

उनका कहना था कि हिंसा का सामना करने के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बल उपलब्ध हैं. पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर ज़िले के लालगढ़ इलाक़े में जारी हिंसा के घटनाक्रम में 17 जून को संदिग्ध माओवादी विद्रोहियों ने सत्तारुढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के छह कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी. पार्टी के छह अन्य कार्यकर्ता अभी लापता बताए जा रहे हैं. विद्रोहियों की मदद से गाँव वालों ने सड़कों पर जाम लगा दिया है, जिससे सुरक्षा बल उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं.

आदिवासी बाहुल्य लालगढ़ इलाक़े में विद्रोहियों और गाँववासियों ने अनेक गाँवों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालयों को आग लगा दी है. <b>'फ़ैसला मुख्यमंत्री को करना है'</b>

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि (पश्चिम बंगाल) सरकार का एक पक्ष कार्रवाई करना चाहता है लेकिन सरकार में दूसरा पक्ष ऐसा करने के नतीजों के बारे में चिंतित है." समाचार एजेंसियों के अनुसार उनका कहना था, "ये फ़ैसला मुख्यमंत्री को करना है. उन्हें अपने सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्र में भेजने चाहिए और उस इलाक़े पर नियंत्रण कायम करना चाहिए जो मार्क्सवादियों के प्रभाव में हैं. केंद्रीय अर्धसैनिक बल पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं और वे राज्य पुलिस को सहयोग और सहायता देंगे." उधर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि केंद्र को प्रभावित इलाक़े में रह रहे लोगों की मदद करनी चाहिए और कुछ हद तक मदद मिलनी शुरु हो गई है. उनका कहना था कि ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि भारत को सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती माओवादियों से ही मिल रही है और ख़ुद प्रधानमंत्री ऐसा कह चुके हैं. ग़ौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल की सरकार को हिदायत दी थी कि वह 'अपने सुरक्षा बलों की पूरी ताकत उस इलाक़े में झोंक दे क्योंकि क़ानून व्यवस्था कायम करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है.'