'बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए'

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि 'पाकिस्तान वहाँ मौजूद भारत विरोधी आतंकवादियों के साथ निपटने में भी वही दृढ़ संकल्प दिखाए जो वह तालेबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में दिखा रहा है.'

रूस के यकतरीनबर्ग शहर में शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक देशों के सम्मेलनों में भाग लेकर दिल्ली लौट रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये विचार पत्रकारों से बातचीत के दौरान रखे. मंगलवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के साथ बातचीत के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति ज़रदारी ने उनसे कहा कि देश कई मोर्चों पर लड़ रहा है और भारत को उसकी मुश्किलों को समझना चाहिए.

मनमोहन सिंह ने संवाददाताओं को बताया, "हम अपने दोस्त तो चुन सकते हैं लेकिन हम अपने पड़ोसी अपनी मर्ज़ी से नहीं चुन सकते. मैं महसूस करता हूँ कि भारत को अपने पड़ोसियों के साथ बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहिए."

'पाक कई मोर्चों पर लड़ रहा है'

पाकिस्तान के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा, "तालेबान और अल क़ायदा का सामना करने के बारे में भारत की शुभकामनाएँ पाकिस्तान के साथ हैं. लेकिन पाकिस्तान जिस दृढ़ संकल्प के साथ उनका सामना करने में जुटा है, हम चाहते हैं कि वह वही रवैया उन आतंकवादियों के साथ भी दिखाए जो भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं."

ग़ौरतलब है कि मुंबई शहर पर नवंबर 2008 में हुए हमलों के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ पहली बार मंगलवार को बातचीत हुई थी.

मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति ज़रदारी से कहा था, "मैं आपसे मिलकर ख़ुश हूँ लेकिन मेरी ये ज़िम्मेदारी है कि मैं आपको बता दूँ कि पाकिस्तान की भूमि का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए."

इस बैठक के बाद घोषणा की गई थी कि दोनों देशों के विदेश सचिवों की जल्द ही बैठक होगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा, "दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक अगले महीने गुटनिरपेक्ष देशों की जुलाई में होने वाली बैठक से पहले हो जानी चाहिए. इस तरह से दोनों पक्षों के बीच बातचीत की समयसारिणी तो है."

राष्ट्रपति ज़रदारी के साथ बातचीत के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह का कहना था, "राष्ट्रपति ज़रदारी का कहना था कि पाकिस्तान कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहा है और जिस भी स्रोत से आतंकवाद पनप रहा हो वो उसका सामना करने के बारे में प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने मुझसे कहा कि भारत को उनकी मुश्किलों को समझना चाहिए."

कश्मीर के मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर मनमोहन सिंह का कहना था कि वहाँ हाल की घटनाएँ दुर्भाग्यपूर्ण हैं और गृह मंत्री ने राज्य का दौरा किया है.

'हुर्रियत ने प्रस्ताव नहीं भेजा'

मनमोहन सिंह का कहना था, "यदि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हुआ है तो इसके ख़िलाफ़ कारगर क़दम उठाए जाएँगे. जैसे ही केंद्र सरकार हर क्षेत्र में सक्रिय होती है, जम्मू-कश्ममीर के विकास के मुद्दे पर ध्यान दिया जाएगा."

उन्होंने कहा, "यदि कोई भी कश्मीरी गुट बातचीत करने में दिलचस्पी रखता है तो उसका स्वागत है और सभी विकल्प खुले हैं. हमने पहले भी हुर्रियत को न्योता दिया था और उन्होंने कहा था कि वे ठोस प्रस्ताव लेकर लौटेंगे लेकिन कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था, "उनका ये भी कहना था कि कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. हमने कहा था कि उनके नामों की हमें सूची दें, लेकिन ये सूची भी नहीं दी गई. लेकिन हम अब भी किसी से भी बातचीत करने के लिए तैयार है यदि वह बंदूक त्याग दे."

'आडवाणी ने अफ़सोस जताया'

भारतीय जनता पार्टी में चल रही अंतरकलह पर पूछे जाने पर मनमोहन सिंह का कहना था, "मैं किसी राजनीतिक दल की दिक्कतों पर ख़ुशी मनाने के पक्ष में नहीं."

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "चुनाव प्रचार के दौरान मैं कुछ बातें कहने पर विवश हो गया था जिनसे भाजपा नेता आडवाणी की भावनाएँ आहत हुई थीं. उन्होंने मुझसे फ़ोन पर बात की और जो उन्होंने कहा था उस पर अफ़सोस ज़ाहिर किया. मैंने भी कहा कि यदि मेरे किसी कथन से उन्हें चोट पहुँची है तो उसके लिए मैं माफ़ी माँगता हूँ. मैं उनके साथ सकारात्मक रिश्ता चाहता हूँ."

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