सौ दिनों के एजेंडे में महिला आरक्षण

प्रतिभा पाटिल
Image caption राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 100 दिन का एजेंडा सामने रखा है

राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बनी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के अगले 100 दिन और पूरे पाँच साल का एजेंडा सामने रखा है.

उन्होंने कहा कि सरकार अगले 100 दिनों में महिलाओं को संसद और विधानमंडलों में 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ पंचायत और स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए समुचित क़दम उठाएगी.राज्य सभा में पेश विधेयक में संसद और राज्य विधान मंडलों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है. फ़िलहाल यह विधेयक राज्य सभा की स्थायी समिति के विचाराधीन है.

मनमोहन सिंह के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया. राष्ट्रपति के अभिभाषण से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नवनिर्वाचित लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अध्यक्ष के आसन तक पहुँचाया.

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि यूपीए सरकार आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अगले पाँच वर्षों के दौरान सरकार की 10 प्राथमिकताओं का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि सरकार आंतरिक सुरक्षा और सांप्रदायिक सदभावना बनाए रखने की कोशिश करेगी, साथ ही आर्थिक विकास को तेज़ करेगी.

सौ दिन का एजेंडा

संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा सामने रखी.

उन्होंने कहा, "महिलाओं को वर्ग जाति और महिला होने के कारण अनेक अवसरों से वंचित रहना पड़ता है. इसलिए पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में आरक्षण बढ़ाकर महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए अगले 100 दिन में संवैधानिक संशोधन करने के क़दम उठाए जाएँगे ताकि अधिक से अधिक महिलाएँ सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश कर सकें."

सरकार अगले 100 दिनों में केंद्र सरकार की नौकरियों में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश करेगी.

इसके साथ-साथ बेहतर समन्वय के लिए महिला सशक्तिकरण पर एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का क़दम उठाया जाएगा.

प्राथमिकता वाले क्षेत्र

अगले पाँच वर्षों के दौरान सरकार ने प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों का ज़िक्र किया है. राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में इन क्षेत्रों के बारे में विस्तार से चर्चा की.

उन्होंने कहा कि सरकार आंतरिक सुरक्षा और सांप्रदायिक सदभावना बनाए रखेगी. साथ ही कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में आर्थिक विकास पर ख़ास ध्यान देगी.

इनके अलावा जो प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं- रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन व्यवस्था में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण, विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन, महिलाओं, पिछड़ों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यों और बुज़ुर्गों के कल्याण के लिए क़दम.

संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2004 में सरकार ने देश के सामने समावेशी समाज और समावेशी अर्थव्यवस्था का वादा किया था और इसके लिए काम किया.

उन्होंने कहा, "मेरी सरकार का मानना है कि इस चुनाव में उसे जो भारी जनादेश प्राप्त हुआ है, वो इन्हीं नीतियों का नतीजा है. यह जनादेश समग्र वृद्धि, समान विकास के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी भारत के लिए है. इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मेरी सरकार और अधिक परिश्रम से और बेहतर ढंग से काम करने को प्रतिबद्ध है."

आर्थिक मंदी

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार आर्थिक मंदी से अधिक प्रभावित क्षेत्रों लघु और मध्यम उद्योग, निर्यात, कपड़ा, बुनियादी सुविधा और आवास क्षेत्र में सुधार पर विशेष ध्यान देगी.

उन्होंने कहा, "वैश्विक मंदी के कारण चालू वित्तीय वर्ष में विकास की गति धीमी होने की संभावना है."

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने इस अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए तीन प्रोत्साहन पैकेजों समेत अनेकों उपाय किए हैं और इनके परिणाम भी सामने आ रहे हैं."

राष्ट्रपति ने इस बात पर संतोष जताया कि देश की अर्थव्यवस्था को वैसी मंदी से नहीं गुज़रना पड़ा जैसा कि विश्व में लगभग अन्य सभी देशों के साथ हुआ है.

उन्होंने कहा कि सरकार मंदी से प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी और निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर ढांचागत क्षेत्रों में सरकारी निवेश को बढाने के लिए उपाय

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