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समलैंगिक संबंधों के आदेश पर प्रतिक्रिया

समलैंगिक संबंधों पर एक ऐतिहासिक आदेश सुनाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है.

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एपी शाह और न्यायाधीश एस मुरलीधर ने गुरुवार को अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 वैध नहीं है.

ये 148 साल पुराना क़ानून है जिसके तहत समलैंगिकता के लिए दस साल तक की क़ैद की सज़ा हो सकती है.

नाज़ फ़ाउंडेशन की ओर से ये जनहित याचिका वर्ष 2001 में दायर की गई थी जिसमें आईपीसी की धारा 377 को चुनौती दी गई थी.

एक समलैंगिक व्यक्ति की प्रतिक्रिया.