गुमशुदा फ़ाइलों का मामला और उलझा

बाबरी मस्जिद
Image caption 6 दिसंबर, 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़ दी गई थी

अयोध्या विवाद की गुमशुदा फाइलों और दस्तावेज़ों का मामला और भी रहस्यमय हो गया है.

मुख्य सचिव अतुल गुप्ता ने दो दिन पहले हाई कोर्ट में हलफ़नामा देकर कहा था कि विवाद से जुडी 23 फा़इलें गृह विभाग के एक विशेष कार्याधिकारी सुभाष भान साध के पास थीं जिनकी मृत्यु हो चुकी है. अब जाँच का काम गृह सचिव को सौंप दिया गया है.

खोजबीन से पता चला है कि सुभाष भान साध की मृत्यु 30 अप्रैल 2000 को दिल्ली में जिस कथित रेल दुर्घटना में हुई थी उस पर उनके परिवार ने संदेह ज़ाहिर करते हुए सुनियोजित हत्या का आरोप लगाया था.

छह जुलाई 2000 को दिल्ली के एक अंग्रेज़ी अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार मृत अधिकारी सुभाष भान के पिता बीर भान साध ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि उनके पुत्र अयोध्या बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित परम गोपनीय फ़ाइलें लेकर जा रहे थे क्योंकि उन्हें दूसरे दिन लिब्रहान जांच आयोग के समाने पेश होना था.

'धक्का दिया गया'

याचिका में कहा गया था कि सुभाष ने अस्पताल में अपने रिश्तेदारों को बताया था कि उसे दिल्ली स्थित तिलक ब्रिज स्टेशन के पास चलती ट्रेन से धक्का दिया गया था. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे. लेकिन अभी तक दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट नही आई है.

सुभाष भान के पिता फरुखाबाद में रहते हैं और टेलीफोन ख़राब होने से उनसे बात नही हो पाई. बेटे सुनील चाँद साध का कहना है कि वो उस समय छोटे थे और उन्हें अभी तक नहीं पता कि दिल्ली पुलिस की जांच में क्या निकला.

ग़ौरतलब है कि उस समय केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थीं.

गृह विभाग के अधिकारियों ने उस समय सफ़ाई दी थी कि अयोध्या विवाद से संबंधित सारी फ़ाइलें विभाग में मौजूद हैं. जबकि अब कहा जा रहा है कि 23 फाइलें गायब हैं.

विभाग के एक अधिकारी का तो अब यह भी कहना है कि सुभाष भान लिब्रहान आयोग के बजाए 1984 में हुए सिख विरोधी दंगो से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में एक मुक़दमे के सिलसिले में दिल्ली गए थे.

'मामला उठेगा'

सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी का कहना है कि इस मामले को वह अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पीठ के सामने उठाएंगे.

हाई कोर्ट ने मुख्यसचिव को कल यानि शुक्रवार को फिर तलब किया है. मुख्यसचिव को यह बताना है कि सरकार ने ग़ायब फाइलों के बारे में अब तक क्या कार्रवाई की है.

यह सारा मामला सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की उस अपील से खुला जिसमें अयोध्या विवाद से जुड़े सन 1949 के सात मूल काग़ाजात अदालत में पेश करने की मांग सरकार से की गई थी.

सरकार का कहना है कि वह काग़ज़ात नहीं मिल रहे हैं जिसपर कोर्ट सख्त नाराज है.

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