जम्मू-कश्मीर पुलिस पर गंभीर आरोप

भारत प्रशासित कश्मीर की सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि शोपियां शहर में दो महिलाओं की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में राज्य पुलिस के शामिल होने के संकेत मिले हैं.

Image caption इस मामले पर कश्मीर में ख़ूब हंगामा हुआ था

ये बात जस्टिस जान आयोग की रिपोर्ट में सामने आई है. उमर अब्दुल्लाह की सरकार में क़ानून मंत्री अब्दुल रहीम राथेर ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया- हालाँकि दोषी की पहचान करने का कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया क्योंकि स्थानीय लोगों ने आयोग के कामकाज में काफ़ी बाधा पहुँचाई. लेकिन आयोग की फ़ाइल में इतनी सामग्री को ज़रूर है जिसके तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस की कुछ एजेंसियों के शामिल होने की बात से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता.

राथेर ने बताया कि पुलिस का विशेष जाँच दल (एसआईटी) इस मामले की जाँच जारी रखेगा ताकि दोषियों को क़ानून के कठघरे में लाया जा सके.

अभियुक्त

उन्होंने बताया कि इस मामले में निलंबित चार पुलिस अधिकारियों को घटना की प्राथमिकी में अभियुक्त बनाया जाएगा.

आयोग की अनुशंसा पर इन अधिकारियों को सरकार ने निलंबित कर दिया था. आयोग ने इन अधिकारियों को सबूत नष्ट करने का दोषी पाया था.

इन अधिकारियों में से एक तत्कालीन ज़िला पुलिस प्रमुख जावेद इक़बाल पर आयोग के सामने झूठी गवाही देने के मामले में मुक़दमा चलाया जाएगा.

हालाँकि राथेर ने उस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने शुरुआत में मुख्यमंत्री को यह कहते हुए बरगलाया था कि न इन महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ है और न ही उनकी हत्या हुई है.

30 मई को इन दोनों महिलाओं के शव मिलने के बाद कश्मीर में काफ़ी हंगामा हुआ था.

पुलिस ने शुरू में इसे दुर्घटना कहा था. लेकिन बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने बलात्कार के बाद इन महिलाओं की हत्या कर दी. फ़ॉरैंसिक टेस्ट में भी बलात्कार की पुष्टि हुई जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.

संबंधित समाचार