मूर्तियाँ लगाने से नहीं रोकेगा कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री मायावती और अन्य दलित नेताओं की मूर्तियाँ लगवाने से वो मना नहीं करेगा.

कोर्ट ने कहा कि वो ऐसे मामलों में दख़ल नहीं करेगा जिनमें राज्य कैबिनेट ने अपनी मंज़ूरी दे दी हो.

मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा,"अगर सरकार ने इसे मंज़ूरी दे दी है तो अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती."

उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती और बसपा के संस्थापक कांशी राम समेत कई नेताओं की मूर्ति स्थापित करने की योजना तैयार की है जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

इसके बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. जब ये मामला सुनवाई के लिए अदालत में पहुँचा था तो 'जल्दबाज़ी' में मायावती ने राजधानी लखनऊ में 15 स्मारकों, पार्कों, चौराहों, मैदानों का उदघाटन कर दिया था.

स्मारकों पर विवाद लखनऊ के एक छोर से दूसरे छोर तक फैले इन स्मारकों में मुख्य है बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल. इसके अलावा राजधानी भर में 14 और स्मारक, पार्क, चौराहे, गैलरी आदि बनवाई गई हैं.

हज़ारों करोड़ की लागत से बने इन स्मारकों में बाबासाहेब अंबेडकर और कांशीराम के अलावा मायावती की भी तीन प्रतिमाएं हैं.

हालांकि मायावती ने उदघाटन के वक़्त दिए गए अपने संबोधन में कहा था कि देश में इससे पहले भी इतनी बड़ी लागत के स्मारक बनते रहे हैं, राजघाट के लिए तो कभी सवाल नहीं उठाया गया तो फिर दलितों के सम्मान से जुड़े स्मारकों पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि स्मारकों में उनकी तीन जगह पर मूर्तियां भी इसलिए लगी हैं क्योंकि दलित विचारक कांशीराम ऐसा चाहते थे कि उनकी प्रतिमाओं के साथ मायावती की भी प्रतिमा लगाई जाए.

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