पाकिस्तान से वार्ता संभव बशर्ते...

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह इसी महीने गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक में मिस्र जाएंगे

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता संभव है बशर्ते वह मुंबई हमलों के दोषियों को सज़ा दिलाए और अपनी ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न होने दे.

इटली में जी-8 और जी-5 देशों की बैठक में शामिल होने के बाद वह शनिवार सुबह भारत लौट गए.

वापसी में अपने विशेष विमान में पत्रकारों से बात करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "हम भी अपने पड़ोसी के साथ रिश्ते सामान्य करना चाहते हैं और सभी मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं. लेकिन उससे पहले पाकिस्तान को चाहिए कि वह आतंकवादी तत्वों पर लगाम लगाए जो भारत में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं."

उनका कहना था, "अगर पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ नहीं होने देने के वादे पर अमल करता है तो हम बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं."

भारतीय प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इसी महीने मिस्र के शर्म अल शेख रिसॉर्ट में गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत होगी.

उनका कहना था, "मैं युसूफ़ रज़ा गिलानी के साथ बातचीत का इतंज़ार कर रहा हूं. मैं उनसे कहूंगा कि मुंबई हमलों के दोषियों को सज़ा दिलाने की प्रतिबद्धता पर पाकिस्तान अमल करे और भारत के ख़िलाफ़ सक्रिय आतंकवादी तत्वों पर लगाम लगाए."

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने धनी देशों के संगठन जी-8 और जी-5 के देशों से भी कहा है कि वे पाकिस्तान पर आतंकवादी गतिविधियाँ ख़त्म करने के लिए दबाव डाले.

'भारत की अहम भूमिका'

इससे पहले इटली के ला-अक़िला शहर में जी-8 देशों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ-साथ फ़्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर बात की.

Image caption प्रधानमंत्री ने अमरीकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत की.

बराक ओबामा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती.

उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि भारत, चीन और ब्राज़ील के बिना कुछ वैश्विक चुनौतियों से निपटा जा सकता है, ये सोचना ग़लत होगा."

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार की भारत की माँग का समर्थन किया. शिख़र सम्मेलन से पहले मनमोहन सिंह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पुनर्गठित करने की माँग की थी.

जी-8 और जी-5 देशों की बैठक में जलवायु परिवर्तन से निपटने पर सहमति बनी. नेताओं ने इस पर सहमति जताई कि वर्ष 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 50 फ़ीसदी की कमी की जाए.

इसमें व्यापार और निवेश में संरक्षणवाद की नीति को अस्वीकार किया गया और दोहा दौर की व्यापार वार्ता को निष्कर्ष तक पहुँचाने पर सहमति बनी.

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