कर्तव्य निभाने की सज़ा?

एक ओर केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई मुख्यमंत्री मायावती और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति बटोरने मामले में चार्जशीट को अंतिम रूप देने में लगी है.

Image caption मायावती पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार्जशीट दायर हो सकता है

तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसे पुलिस अधिकारी को निलंबित कर रखा है, जिसने सीबीआई में रहते हुए मायावती और उनके परिवार वालों की अघोषित संपत्ति का पता लगाया था.

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार इस अधिकारी को बहाल नही कर रही है.

सीबीआई ने धीरेन्द्र राय नाम के इस पुलिस अधिकारी को मायावती के ख़िलाफ़ जाँच में उम्दा काम के लिए नकद इनाम दिया और राष्ट्रपति से पुलिस पदक भी दिलवाया.

लेकिन अब वह मायावती से उनकी रक्षा करने में असमर्थ है चूँकि वह अब सीबीआई की प्रतिनियुक्ति से वापस आ गए हैं.

रोक

हाईकोर्ट ने पिछले साल 20 जून को अपने आदेश में धीरेन्द्र राय के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए कहा था कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप बहुत तुच्छ किस्म के हैं और उनके लिए कोई बड़ा दंड नही दिया जा सकता.

हाईकोर्ट ने कहा कि धीरेन्द्र राय को निलंबित करने के जो आधार बनाए गए हैं वह उचित नही हैं. ख़ासकर तब जबकि उन्होंने अपनी जानकारी और योग्यता के हिसाब से अपने कर्तव्य को अंजाम दिया.

लेकिन राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाख़िल कर दी.

संयोग से इस अपील पर भी सुनवाई सोमवार 13 जुलाई को ही होनी है. 13 जुलाई को ही मायावती की उस याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमे उन्होंने अपने ख़िलाफ़ सीबीआई में कायम मुक़दमा ख़ारिज करने की मांग की है.

सीबीआई ने यह मुक़दमा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही लिखा था.

मामला

धीरेन्द्र राय ने हाईकोर्ट में दाख़िल याचिका में कहा है कि सितंबर 2003 में वह एक इंस्पेक्टर के रूप में सीबीआई की उस टीम में शामिल थे, जिसने ताज हेरिटेज मामले की जाँच के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों का दौरा करके मायावती और उनके परिजनों की अकूत संपत्ति का पता लगाया था.

यह सारी जानकारी सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी और उसी के आधार पर अदालत ने मायावती के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कराया था.

इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय सीबीआई की उस टीम में भी शामिल थे, जिसने मायावती के 13 माल एवेन्यू बंगले की तलाशी ली थी.

इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय ने 10 मई 2005 को दिल्ली में मायावती के हुमायूँ रोड स्थित मकान पर उनका बयान दर्ज किया था.

धीरेन्द्र राय ने मायावती और उनके गुरु कांशीराम के अनेक सहयोगियों और परिवार वालों के बयान भी दर्ज किए थे.

इनाम

सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने धीरेन्द्र राय को इस बात के लिए इनाम दिया कि उन्होंने एक बड़ा जोखिम लेकर मायावती की अघोषित संपत्ति का पता लगाया.

उन्होंने मायावती को कथित दान देने वाले ऐसे लोगों का पता लगाया जो बड़े नेताओं और अधिकारियों से जुड़े थे.

सीबीआई की सिफ़ारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने धीरेन्द्र राय को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए 26 जनवरी 2005 को पुलिस मेडल से सम्मानित किया.

इस बीच धीरेन्द्र राय की पदोन्नति हो गयी और वह उपाधीक्षक बना दिए गए. सात साल की प्रतिनियुक्ति सेवा पूरी करने के बाद धीरेन्द्र राय 31 जुलाई 2006 को उत्तर प्रदेश की सेवा में वापस आ गए.

तबादले

मई 2007 में सुश्री मायावती वापस मुख्यमंत्री बन गईं. उस समय धीरेन्द्र राय एसटीएफ़ में तैनात थे. वे 22 जुलाई 2007 को उस टीम में शामिल थे, जिसने चित्रकूट जनपद में ठोकिया डाकू गिरोह का मुक़ाबला करके उसके एक साथी मैयादीन को मार दिया.

लेकिन दुर्भाग्य से जब वह दूसरे दिन अपनी टीम के साथ जंगल से वापस आ रहे थे, तो ठोकिया ने घेरकर हमला किया, जिसमें पुलिस के छह जवान मारे गए.

इसके बाद धीरेन्द्र राय के तीन-चार तबादले हुए और मई 2008 में उन्हें इस आधार पर निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने ठोकिया गैंग से मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम का ठीक से नेतृत्व नही किया. लेकिन हाईकोर्ट ने इस आरोप को बहुत ओछा बताते हुए निलंबन रद्द कर दिया.

राज्य सरकार ने अपने जवाब में इस तथ्य को स्वीकार किया कि धीरेन्द्र राय मायावती के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच में शामिल थे, लेकिन इस बात से इनकार किया कि उसी वजह से उन्हें निलंबित किया गया.

संयोग से धीरेन्द्र राय को लगभग उसी समय निलंबित किया गया जब सीबीआई ने अपनी जाँच पूरी करके यह निष्कर्ष निकाला कि मायावती पर भ्रष्टाचार का मुक़दमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.

धीरेन्द्र राय के वकील आईबी सिंह कहते हैं कि धीरेन्द्र राय का निलंबन बदले की भावना से प्रेरित है, क्योंकि सीबीआई में रहते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ जाँच की थी और उनकी संपत्ति के ऐसे तथ्य जुटाए जो और लोग नही कर पाए थे.

सीबीआई के अधिकारी भी मानते हैं की धीरेन्द्र राय का उत्पीड़न हो रहा है लेकिन उनका कहना है कि वह कुछ नहीं कर सकते चूँकि वह अब राज्य सरकार की सेवा में हैं.

धीरेन्द्र राय ने फिर से केंद्रीय सेवा में जाने का आवेदन किया है, लेकिन जब तक निलंबन समाप्त नहीं होता, वह नहीं जा सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित नहीं किया फिर भी मायावती सरकार उन्हें बहाल नही कर रही है.

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