सरकार ने कौमार्य परीक्षण उचित बताया

सामूहिक विवाह (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption कौमार्य परीक्षण को समाज का एक बड़ा वर्ग औरतों के सम्मान पर कुठाराघात मानता है

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सामूहिक विवाह में चिकित्सकों के आवेदक महिलाओं के कौमार्य परीक्षण को राज्य सरकार ने उचित बताया है.

ये परीक्षण उन्हें इसलिए करना पड़ा ताकि प्रशासन को इसका सबूत मिल सके कि वे गर्भवती नहीं हैं. इस तरह की जांच का एक और मामला आदिवासी बहुल इस ज़िले के बुडहार प्रखंड में भी सामने आया है. इस प्रक्रिया से गुजरी कन्याएँ इसे शर्मनाक और अपमानजनक बता रही हैं. इसे समाज का एक वर्ग औरतों के सम्मान पर कुठाराघात और मानवाधिकारों का हनन मानता है. मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और सरकार के प्रवक्ता कैलाश विजयवर्गीय ने बीबीसी से बातचीत में पहले तो किसी तरह के कौमार्य परिक्षण की बात से इनकार किया. जब उन्हें बताया गया कि शहडोल के जिलाधीश ने चिकित्सकीय जांच की पुष्टि की है तो उन्होंने कहा "अगर कुछ लोगों ने योजना का ग़लत लाभ लिया है तो उनका परीक्षण कराए जाने में कुछ ग़लत नहीं है." विजयवर्गीय ने कहा कि अगर कोई ग़लत जानकारी देता है तो ग़लती तो उसकी है, अधिकारी की नहीं.

जब उनसे पूछा गया क्या ये राज्य सरकार की नीति है तो उन्होंने कहा "एक दो बार इस तरह के परीक्षण होंगे, लोगों को पता चलेगा तो लोग अपने आप झूठ बोलना बंद कर देंगे."

'महिलाओं का अपमान'

दूसरी ओर मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में प्रशासन के कराए गए कौमार्य परीक्षण की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कड़ी निंदा की है.

बीबीसी से एक विशेष बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा," किसी भी महिला का कौमार्य परीक्षण कराना उसे अपमानित करना है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता." उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने प्रशासन को इस तरह के कामों से दूर रखना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने मांग की कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस घटना में जाँच कर कार्रवाई करनी चाहिए. राज्य शासन की कन्यादान योजना पर टिप्पणी करते हुए दिग्विजय सिंह के कहा कि ये योजना अच्छी है पर इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और इसका दुरूपयोग हो रहा है.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसी तरह से कई शादीशुदा लोग इस तरह के विवाह में शामिल हो रहे हैं. दिग्विजय सिंह बोले, "मुख्यमंत्री ये बताएं कि क्या कौमार्य परीक्षण उचित था और अगर नहीं था तो वो क्या कार्रवाई कर रहे हैं, इसका उत्तर उन्हें देना चाहिए." उन्होंने बताया कि वो इस बारे में मुख्यमंत्री को एक पत्र लिख रहे हैं और कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को राज्य विधान सभा और इसके बाहर भी उठाएगी.

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