अच्युतानंदन पोलित ब्यूरो में नहीं

अच्युतानंदन
Image caption अच्युतानंदन को पोलित ब्यूरो से हटा दिया गया है

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की बैठक में केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन को पोलित ब्यूरो से हटाने का फ़ैसला लिया गया है.

दिल्ली में हुई बैठक में फ़ैसला लिया गया कि वे केरल में मुख्यमंत्री और पार्टी नेता के तौर पर काम करते रहेंगे.

पार्टी की ओर से जारी बयान में लिखा गया है कि संगठनात्मक मूल्यों और अनुशासन भंग करने की घटनाओं को देखते हुए वीएस अच्युतानंदन को पोलित ब्यूरो से हटाया जाए.

केरल ईकाई में विवाद के मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए पार्टी के पोलित ब्यूरो की शनिवार से नई दिल्ली में बैठक हो रही थी.

वहीं पार्टी के पूर्व सचिव पिनरई विजयन मामले पर भी बयान में टिप्पणी की गई है. बयान में कहा गया है, "केंद्रीय समिति ने तीन पनबिजली परियोजनाओं के ठेके दिलाने में अनियमितता के आरोपों पर पोलित ब्यूरो की रिपोर्ट का अध्ययन किया है. समिति का मत है कि 1996-98 में तत्कालीन एलडीएफ़ सरकार में बिजली मंत्री पिनरी विजयन किसी भ्रष्ट गतिविधि में लिप्त नहीं थे."

पार्टी ने कहा है कि वो इस मामले में राजनीतिक और क़ानूनी स्तर पर लड़ेगी.

भ्रष्ट्राचार का मामला

पिछले महीने जून में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने पिनरई विजयन के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में आरोपपत्र दाख़िल किया था.

मामला वर्ष 1998 में कनाडा की एक कंपनी एसएनसी लवलीन को तीन पनबिजली परियोजना के ठेके दिलाने में अनियमितता का है.

इस मामले में विजयन के अलावा आठ अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी आरोपपत्र दाख़िल किया गया है.

पूर्व मंत्री विजयन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साज़िश) और भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून की धारा 13 (1) और 13 (2) के तहत मामला दर्ज हुआ है.

राज्यपाल आरएस गवई ने राज्य कैबिनेट की सिफ़ारिश को नज़रअंदाज़ करते हुए विजयन के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी थी.

सीबीआई का कहना है कि कंपनी को ठेका देने में अनियमितता बरती गई और इसमें तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री रहे विजयन की भूमिका थी.

सीबीआई ने जाँच के बाद कहा कि इस मामले में सरकारी कोष को भारी घाटा उठाना पड़ा.

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