'पाकिस्तान के साथ हुई है बातचीत'

मनमोहन सिंह
Image caption रुस के येकाटेरिनबर्ग में महीने भर पहले मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी के बीच मुलाक़ात हुई थी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान से साथ रिश्तों में आ रही दिक्कतों के बावजूद उन्होंने उम्मीद ''नहीं छोड़ी है'' और दोनों पक्षों के बीच उच्चायुक्त स्तर पर बातचीत हुई है.

जी-8 देशों की यात्रा से वापस लौटते हुए उन्होंने शनिवार देर रात संवाददाताओं को बताया कि पिछले महीने रुस में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ उनकी वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच ''उच्चायुक्त, आईएसआई और विदेश मंत्रालय स्तर पर बातचीत'' हुई है.

हालांकि प्रधानमंत्री ने ये नहीं बताया कि भारत की ओर से आईएसआई प्रमुख शुजा पाशा से किसने बात की है लेकिन उन्होंने साफ़ कहा, '' उन्होंने ( पाकिस्तानी पक्ष) ने कुछ सुझाव दिए थे.. कुछ जानकारी भी दी थी कि वो मुंबई हमलों के दोषियों को सज़ा देने ेक लिए क्या क़दम उठा रहे हैं.''

पाकिस्तान के साथ फ़िलहाल चल रहे तनाव के बारे में प्रधानमंत्री का कहना था कि दोनों देश पड़ोसी हैं. उनका कहना था, '' हम अपने दोस्त चुन सकते हैं पड़ोसी नहीं. भारत विकास के जिन लक्ष्यों को पूरा करना चाहता है उसके लिए पड़ोसियों के साथ शांति ज़रुरी है.''

उनका कहना था, '' पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्तों के ख़राब होने के जो भी कारण हैं और जो भी मुद्दे हैं उन्हें सुलझाने के हम हरसंभव प्रयास करेंगे. हमें बस इस बात के सबूत चाहिए कि पाकिस्तान उन आतंकी तत्वों को ख़त्म करेगा जो अपनी पूरी ताक़त भारत को अस्थिर करने में लगा रहे हैं. ''

उन्होंने कहा कि वो मिस्र के श्राम अल शेख में गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक के दौरान वो पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी से मिलेगें और विचारों का आदान प्रदान करेंगे.

उनका कहना था, '' मुझे उम्मीद है कि बैठक में पाकिस्तान इस बात की फिर पुष्टि करेगा कि वो मुंबई हमलों के दोषियों को सज़ा देंगे और अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ किसी गतिविधि के लिए नहीं होने देंगे. अगर वो ऐसा करते हैं तो हम एक क़क़दम आगे बढ़कर रिश्ते सामान्य करेंगे.''

रुस में पूरी मीडिया के सामने ज़रदारी से साफ़ साफ़ अपना रुख स्पष्ट करने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका इरादा ज़रदारी के सम्मान को ठेस पहुंचाना नहीं था. मनमोहन सिंह रुस में प्रेस कांफ्रेंस शुरु होते ही ज़रदारी से कहा था कि उन्हें भारत की जनता से जजनादेश मिला है ये कहने के लिए कि पाकिस्तान की ज़मीन से भारत के ख़िलाफ़ आतंकी गतिविधियों की अनुमति न दी जाए.

मनमोहन सिंह का कहना था, '' मैं जब रुस में पाकिस्तानी राष्ट्रपति से बात कर रहा था तो भूल गया था कि वो वहां मीडिया भी मौजूद है.''

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने औद्योगिक देशों के साथ बैठकों के दौरान भी भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान से हो रही आतंकवादी गतिविधियों का ज़िक्र किया है और लगभग सभी देशों ने माना कि भारत पिछले 25 वर्षों से आतंकवाद का शिकार हो रहा है.