नक्सली हमले में पुलिस अधीक्षक की मौत

फ़ाइल फोटो
Image caption नक्सली हमलों में तेज़ी आई है.

छत्तीसगढ़ राजनंदगांव इलाक़े में हुए एक नक्सली हमले में 29 पुलिसकर्मी मारे गए हैं.

इस हमले के बाद मुख्य मंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया लेकिन इस लड़ाई में फिलहाल सेना को शामिल किए जाने की संभावनाओं से इंकार किया है.

उन्होंने कहा है कि वह इस मामले में केंद्र सरकार से अर्ध सैनिक बलों और पुलिस की बेहतरी के लिए बेहतर आर्थिक मदद की मांग करेंगेंलेकिन फिलहाल नक्सली विरोधी मुहिम में सैनिक अभियान की बात नहीं सोची जानी चाहिए.

रमन सिंह ने यह बयान राजधानी रायपुर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दिया है.

रविवार को राजनंदगांव में हुए नक्सली हमले के बाद पुलिस ने मृतकों, घायलों और संदिघ्ध विद्रोहियों के तलाश में महाराष्ट्र की सीमा से लगे इस इलाके की सघन छान बीन शुरू कर दी है.

पुलिस द्वारा अबतक बरामद किया गए शवों की संख्या 29 हो गयी है.

अबतक किसी नक्सली की लाश पुलिस के हाथ नहीं लगी है.राजनंदगांव के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे कल के आपरेशन में मारे गए थे.

पुलिस महानिरीक्षक मुकेश गुप्ता का कहना है कि नक्सलियों का यह हमला पुलिस द्वारा उनके खिलाफ तेज़ की गई मुहिम की बौखलाहट के तौर पर किया गया है.

पुलिस ने हाल में ही ज़िले के नक्सल प्रभावित इलाके में तीन नई पुलिस चौकियां खोलने के साथ ही इलाके की गश्त भी तेज़ कर दी थी.

माओवादियों ने कल अपनी पहली वारदात इन्हीं में से एक पुलिस चौकी, मदनवाडामें की जहाँ उन्होनें दो पुलिस वालों को मार डाला.बाद में जीप और मोटरसाइकलों पर सवार होकर चौकी की मदद को जा रहे दो पुलिस दलों पर तकरीबन दो से तीन सौ माओवादियों ने पहले तो बारूदी सुरंगों को उडाकर हमला किया और फिर उनपर गोलियों की बौछार शुरू कर दी.

दोनों पक्षों में यह गोलाबारी घंटों चली मगर पुलिस अधीक्षक के साथ मौजूद दल नक्सलियों के घेरे में आ गया और वह और उनके साथ मौजूद पच्चीस लोग इस मुठभेड़ में मारे गए.

विद्रोहियों द्वारा अपनाए गए पैटर्न को देखते हुए कई आला पुलिस अधिकारियों का मानना है सुबह की पहली घटना के ज़रिए बड़े पुलिस दल को फंसाया गया था.

नक्सलियों ने यह तीनों वारदातें करीब दस से पंद्रह किलोमीटर के इलाके में हुई हैं.जिस घटना में पुलिस अधीक्षक मारे गए उसमें तो उन्होंने एक पक्की सड़क को ही बारूदी सुरंग लगाकर उड़ा दिया था.

कम से कम हाल में हुई यह दूसरी नक्सली वारदात है जिसमें घटनाओं को लगभग उस समय अंजाम दिया गया है जब कोई बड़ी शख्सियत या केंद्रीय नेता छत्तीसगढ़ में मौजूद हो.

हाल में ही राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के दौरे के समय नक्सिलयों ने बस्तर इलाके में चार पुलिस कर्मियों को मार दिया था; घटना से एक दिन पहले केंद्रीय स्टील मंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य का दौरा किया था.

कल के नक्सल विरोधी ऑपरेशन में शामिल मुकेश गुप्ता ने बयान दिया है कि नक्सलियों के मुकाबले उनके पास फोर्स कम थी.

इस पूरी घटना के बाद एक बार फिर से पुलिस के नक्सलियों के छापामार युद्घ के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम के तरीकों पर सवाल उठाये जा रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकी राम कँवर के इस बयान पर की जब नक्सली यह पूरी मुहिम प्लान कर रहे थे तो पुलिस महानिदेशक साहित्यिक गतिविधियोंमें व्यस्त थे इस पूरी घटना को नया रंग दे दिया है.

विरोधी कांग्रेस पार्टी से मुख्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है और कहा है कि राज्य में राष्ट्र पति शासन लगाया जाना चाहिए.

मई के महीने में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायगढ़ से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर एक बारूदी सुरंग में विस्फोट करके नक्सलियों ने एक आम नागरिक समेत 13 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला था.

उस घटना के एक हफ़्ते पहले ही एक और हमले में 11 लोगों की मौत हो गई थी.

रविवार को राजनंदगांव में हुए इस हमले की और जानकारी फ़िलहाल नहीं मिल पाई है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले दिनों पुलिस पार्टी पर नक्सलियों द्वारा कम से कम आधे दर्जन बड़े हमले हुए हैं, और पहले भी नक्सलियों ने एक पुलिस अधीक्षक के काफिले को भी बारूदी सुरंग से उड़ाने की कोशिश की थी.

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