कश्मीर में शहीदी दिवस पर बंद

प्रदर्शनकारी
Image caption कश्मीर में केंद्र सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सरकारी सामान को बहुत क्षति पहुंचाई जाती है.

भारत प्रशासित कश्मीर में शहीदी दिवस के अवसर पर व्यापक बंद का आह्वान किया गया है और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है.

शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी श्रीनगर में प्रदर्शनकारी लाल चौक तक मार्च करने वाले थे लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है ताकि यह प्रदर्शन रोका जा सके.

1931 में तत्कालीन राजा के विरोध में एक जूलूस निकाला गया था जिस पर फायरिंग के दौरान 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. अभी भी उसी घटना की याद में भारत समर्थक और भारत विरोधी लोग नारेबाज़ी करते हैं.

आज सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता ने नक्शबंद साहेब में मारे गए लोगों की याद में फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि अर्पित की.

विपक्ष की नेता महबूबा मुफ़्ती ने भी शहीदों की याद में फूल चढ़ाए. प्रदर्शन की आशंका के कारण मीरवायज़ उमर फ़ारुक समेत कश्मीर के अधिकतर अलगाववादी नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया है.

पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने लाल चौक की तरफ मार्च के आह्वान को देखते हुए दो से तीन लोगों के एक जगह जमा होने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

लाल चौक की तरफ़ मार्च करने का आह्वान मीरवायज़ ने किया था जो ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के के उदारवादी धड़े के प्रमुख हैं.

पुलिस ने श्रीनगर जाने वाली हर सड़क पर घेराबंदी कर दी है ताकि बाहर से प्रदर्शनकारी श्रीनगर न आ सकें. घाटी में अधिकतर दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं. राज्य में आधिकारिक छुट्टी लागू कर दी गई है इसलिए सभी सरकारी प्रतिष्ठान भी बंद हैं.

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