मायावती की याचिका पर सुनवाई टली

मायावती
Image caption मुख्यमंत्री मायावती के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई मामले हैं.

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को मुख्यमंत्री मायावती की उस याचिका पर फिर सुनवाई आठ हफ़्तों के लिए टाल दी हैजिसमें उन्होंने अपने ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मुक़दमे को ख़ारिज़ करने की मांग की है.

मायावती का कहना है कि ये मुक़दमा उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक विद्वेष की वजह से दायर किया गया था.

मायावती ने ये याचिका पिछले साल दायर की थी और जस्टिस बालाकृष्णन की पीठ ने कहा था कि सीबीआई इस मामले में फ़िलहाल चार्जशीट दाखिल न करे.

सीबीआई ने अदालत में दाखिल अपने हलफ़नामों में इस बात पर ज़ोर दिया है कि मायावती पर आय से अधिक संपति अर्जित करने के मामले में पर्याप्त सबूत हैं.

इस मामले में सीबीआई के अधिकारी कहते हैं कि क़ानूनन आपराधिक मुक़दमे की जांच के मामले में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती और दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए.

क़ानून के जानकारों का भी कहना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के अनुसार सीबीआई को अपनी जांच रिपोर्ट यानी चार्जशीट ट्रायल कोर्ट में ही पेश करनी चाहिए.

चार्जशीट में देरी

सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती की याचिका की वजह से ही चार्जशीट दायर करने में देर हो रही है.

इस मामले में ये मुक़दमा सन 2002 में उस समय शुरु हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट की ही एक पर्यावरण संबंधी पीठ ने आगरा के ताज कॉरीडोर मामले में सीबीआई को जांच का आदेश दिया था. इसकी लागत 175 करोड़ रुपए थी. उस समय ये आरोप लगाया गया था कि इस परियोजना में घोटाला हुआ है.

सीबीआई ने अपनी जांच याचिका सुप्रीम कोर्ट में दी थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ही मायावती के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया था.

सीबीआई ने दिल्ली पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल और अन्य स्थानों पर तलाशी के बाद मायावती और उनके परिवार वालों के क़रीब 100 बैंक खातों का पता लगाया था और इतनी ही अचल संपत्तियों का पता लगाया था. इसके बाद सीबीआई ने कहा था कि मायावती ने भ्रष्टाचार के ज़रिए अकूत संपत्ति अर्जित की है.

ताज कॉरीडोर के मामले में सीबीआई पहले ही लखनऊ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है लेकिन मायावती के लोक सेवक होने के नाते सीबीआई ने राज्यपाल से मुक़दमा चलाने की अनुमति मांगी थी जो नहीं दी गई थी.

माना जाता है कि उस समय केंद्र सरकार से मायावती के रिश्ते अच्छे थे इसलिए राज्यपाल ने अनुमति नहीं दी थी.

सीबीआई ने राज्यपाल के इस निर्णय के ख़िलाफ हाई कोर्ट में अपील कर रखी है क्योंकि इस तरह की नज़ीरें हैं कि लोक सेवकों को अपने आधिकारिक ड्यूटी के लिए क़ानूनी संरक्षण है न कि भ्रष्टाचार के लिए.

इसे देखते हुए संभावना है कि ताज कॉरीडोर का मामला फिर से खुल जाए.

एक और मामला

उधर मायावती सरकार के फ़ैसले से जुड़ा एक और मामला आज ही कोर्ट में आना है.

मायावती सरकार ने उस पुलिस अधिकारी को बहाल करने से इंकार किया है जिन्होंने सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान मायावती के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों का पर्दाफ़ाश किया था.

धीरेन राय नाम के इस अधिकारी को अपने कार्य के लिए राष्ट्रपति पदक मिल चुका है लेकिन जब वो सीबीआई के अपने कार्यकाल से वापस राज्य सेवा में आए तो उन्हें पद से हटा दिया गया.

राय ने इसके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने राज्य सरकार से राय को बहाल करने के आदेश दिए.

सरकार ने राय को बहाल तो नहीं ही किया साथ ही हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

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