कौमार्य परीक्षण पर विवाद बढ़ा

सामूहिक विवाह (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption कौमार्य परीक्षण को समाज का एक बड़ा वर्ग औरतों के सम्मान पर कुठाराघात मानता है

मध्य प्रदेश में सरकारी सामूहिक विवाह सम्मलेन के पहले कौमार्य परीक्षण कराए जाने का मसला तूल पकड़ता जा रहा है.

सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने राज्य सरकार से इस मामले में शाम छह बजे तक जवाब देने को कहा है. दूसरी तरफ राज्यसभा में भी इस मसले पर काफी हंगामा हुआ. गिरिजा व्यास ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार से फ़ोन पर जवाब तलब किया है क्योंकि मसला संजीदा था. उन्होंने इस मामले में सरकार को चिट्ठी भी लिखी है. उन्होंने कहा, “वो कह रहे हैं की ये कौमार्य परिक्षण नहीं था पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप शादी के लिए पैसा देना हो..दें या ना दें पर आप इस तरह से किसी औरत की बेइज्ज़ती नहीं कर सकते हैं”. राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य संतोष बगरोडिया ने संसद में शून्यकाल के दौरान ये मामला उठाते हुए कहा कि ये संपूर्ण नारी जाति का अपमान है.

अपमान पर विवाद

Image caption मध्यप्रदेश में सामुहिक विवाह से पहले कुछ महिलाओं का कथित रूप से कौमार्य परीक्षण किया गया

संतोष बगरोडिया के इस बयान पर सोमवार को राज्यसभा में भी विवाद खड़ा हो गया. उनके ऐसा कहते ही राज्यसभा में मौजूद एसएस अहलुवालिया, प्रकाश जावडेकर समेत अन्य भाजपा सदस्यों ने इसका विरोध किया.

हालांकि बगरोडिया ने ये भी कहा की वैसे तो कन्यादान योजना बहुत अच्छी है पर ये घटना बहुत निंदनीय है.

उन्होंने ये भी कहा की ज़िले के कलेक्टर ने ये स्वीकार कर लिया है कि महिलाओं का परीक्षण किया. हालांकि वो इसे गर्भ परिक्षण बता रहे हैं. बगरोडिया ने यह भी सवाल उठाया कि जब कलेक्टर इस घटना में ख़ुद शामिल है तो इस बात की संभावना ख़त्म हो जाती है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके. मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता कैलाश विजयवर्गीय ने बीबीसी से बातचीत में पहले तो किसी तरह के कौमार्य परिक्षण की बात से इनकार किया. जब उन्हें बताया गया कि शहडोल के जिलाधीश ने चिकित्सकीय जांच की पुष्टि की है तो उन्होंने कहा “अगर कुछ लोगों ने योजना का ग़लत लाभ लिया है तो उनका परीक्षण कराए जाने में कुछ ग़लत नहीं है.”

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