दार्जिलिंग में हड़ताल से जनजीवन प्रभावित

दार्जिलिंग (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption गोरखा जनमुक्ति मोर्चा अलग गोरखालैंड की माँग कर रहा है

पश्चिम बंगाल के पर्वतीय इलाक़े दार्जिंलिंग में सोमवार शाम से शुरू हुई बेमियादी हड़ताल से जनजीवन ठप हो गया है.

इस हड़ताल का आह्वान गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने किया है. नेपाली भाषा बोलनेवाले गोरखाओं का ये संगठन स्वतंत्र गोरखालैंड की माँग कर रहा है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इस साल की शुरुआत में भी अपना आंदोलन छेड़ा था. लेकिन ये हिंसक हो उठा था और इस दौरान अनेक लोगों की मौत हो गई थी.

लोकसभा चुनावों की घोषणा के बाद ये आंदोलन स्थगित कर दिया गया था.

हाल के लोक सभा चुनावों में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जसवंत सिंह का समर्थन किया था.

भाजपा का पश्चिम बंगाल में कोई प्रभाव नहीं है लेकिन मोर्चे की समर्थन की वजह से जसवंत सिंह भारी अंतर से जीत गए थे.

जसवंत सिंह अलग गोरखालैंड की माँग के समर्थन में खुलकर आ गए हैं जिसकी वजह से मोर्चे के अभियान को बल मिला है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चे के महासचिव रोशन गिरि का कहना था,'' पश्चिम बंगाल दार्जिलिंग को क्यों अपने साथ रखना चाहता है. ये अलग तरह का इलाक़ा है और इसकी राजनीति भी राज्य से अलग है.''

उनकी दलील है कि यदि झारखंड और छत्तीसगढ़ को बिहार और मध्य प्रदेश से अलग करके अलग राज्य बनाया जा सकता है तो गोरखालैंड को पश्चिम बंगाल से अलग क्यों नहीं किया जा सकता है.

इस हड़ताल से पर्यटन और चाय उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

कोलकाता स्थित नेपच्यून होलीडेज़ की एलौरा दासगुप्ता कहती हैं,'' दार्जिलिंग बंगाली पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र हैं लेकिन अब वो दार्जिलिंग से वापस जा रहे हैं.

दार्जिलिंग मिशनरी स्कूलों के लिए भी प्रसिद्ध है, पिछले बार की हिंसा को देखते हुए मैदानी इलाक़ों के छात्र भी वापस जाने लगे हैं.

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