नक्सल समस्या की गंभीरता नहीं समझ पाए

चिदंबरम
Image caption पिछले कुछेक वर्षों में देश के कई राज्यों में नक्सली हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार देश में नक्सली समस्या की गंभीरता को आँकने में विफल रही है.

चिदंबरम ने बुधवार को राज्य सभा में कहा कि सरकार ने नक्सली समस्या को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जितनी गंभीरता से लेना चाहिए था.

उनका कहना था, ''हमने वामपंथी चरमपंथ की चुनौती को ठीक से नहीं आंका.हमने इस चुनौती को उतनी तवज्जो नहीं दी जितनी उसे मिलनी चाहिए थी.''

चिदंबरम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंगलवार को झारखंड पुलिस ने माओवादियों को भेजा गया संचार का सामान बरामद किया और दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने 29 पुलिसकर्मियों को मार डाला है.

पुलिस का कहना है कि वाकी टॉकी, रेडियो सेट, माइक्रो टेप रिकार्डर जैसे ये सामान माओवादियों को दिल्ली से घरेलू विमान के ज़रिए भेजे गए थे.

चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने माओवादियों से निपटने के लिए एक योजना बनाने की ज़िम्मेदारी सैन्य सलाहकार को दी है.

राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों ख़ासकर उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में एक संयुक्त योजना बन रही है.

उनका कहना था, ''राज्य सरकारों के साथ बातचीत के ज़रिए योजना बन रही है. हमने एक सैन्य सलाहकार भी नियुक्त किया है जो हमें वामपंथी चरमपंथियों से निपटने के तौर तरीकों की जानकारी देंगे.''

उन्होंने कहा, ''आज नक्सल गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं. हम उनसे सामना करने की तैयारी कर रहे हैं. मैं इससे अधिक कुछ नहीं कह सकता.''

गृह मंत्री ने कहा कि वो नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार विमर्श कर रहे हैं और अगस्त में सभी राज्यों के साथ एक बैठक भी होगी.

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