समलैंगिकों के लिए अलग कॉलोनी बनें

Image caption दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में समलैंगिक संबंधो को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फ़ैसला दिया

राजस्थान में अजमेर के दो लोगों ने समलैंगिकों के लिए अलग से कॉलोनी बसाने की माँग को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.

इन लोगों ने अजमेर की एक अदालत में जनहित याचिका दायर कर समलैंगिकों की पहचान कर उनके लिए अलग से कॉलोनी बसाने का आग्रह किया है.

अदालत इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समलैंगिकों की पहचान कर उन्हें बाकी समाज से अलग रखा जाना चाहिए.

याचिका

अजमेर के एक वकील सुभाष भदौरिया और एक नागरिक शिवदत्त पराशर ने मुंसिफ न्यायालय में याचिका दाखिल कर सरकार से समलैंगिकों को चिन्हित कर उनके लिए एक अलग कॉलोनी बनाने की गुहार की है.

याचिका में कहा गया है की हिंदू धर्म, मान्यताओं और पुराणों में कहीं भी समलैंगिकों को मान्यता नहीं है.

भदौरिया कहते हैं, ''हिंदू धर्म में शादी आनंद के लिए नहीं, बल्कि वंश वृद्धि के लिए की जाती है. हाल के अदालती फैसले से बड़ी सामाजिक समस्या खड़ी होने वाली है. इसीलिए हमने ये मुद्दा अदालत में उठाया है."

याचिका में कहा गया है कि इन समलैंगिकों को समाज से अलग और शहर से दूर किसी कॉलोनी में रखा जाना चाहिए ताकि, समाज में विकृति पैदा न हो. याचिकाकर्ताओं को भरोसा है की अदालत उनकी गुहार सुनेगी और इस पर कार्रवाई करेगी.

याचिका में राज्य सरकार को प्रतिपक्षी पक्षकार बनाया गया है. अदालत सोमवार को फैसला करेगी की इस मुद्दे पर सरकार को नोटिस जारी किया जाए या नहीं.

याचिकाकर्ता भदौरिया का कहना है कि वे अदालत से अस्थाई राहत की भी फरियाद करेंगे, ताकि जब तक सुनवाई चले, तब तक समलैंगिकों के लिए कोई तात्कालिक व्यवस्था हो सके.

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