हिलेरी क्लिंटन का कूटनीतिक इम्तहान

हिलेरी क्लिंटन
Image caption हिलेरी क्लिंटन 1995 में पहली बार भारत दौरे पर आईं थीं

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास बनी हुई है. साथ ही हिलेरी की कोशिश अमरीका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देने और इन्हें आगे बढ़ाने की होगी.

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन 1995 में पहली बार भारत आईं थी और वे भारत में काफ़ी लोकप्रिय हैं. उनके इस दौरे का असर ये रहा कि पाँच साल बाद जब उनके पति राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए तो उनकी यात्रा बेहद सफल रही.

हिलेरी क्लिंटन अब बदली हुई भू्मिका में हैं और इस बार अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की प्रतिनिधि के रूप में भारत आई हैं.

इस दौरे की ख़ासियत ये भी है कि कोई प्रमुख अमरीकी हस्ती पहली बार पाकिस्तान का दौरा किए बिना भारत आ रही है.

रिश्तों में मज़बूती

ओबामा के पूर्ववर्ती जॉर्ज डब्ल्यू बुश को जहाँ भारत के साथ रिश्ते सुधारने और असैन्य परमाणु समझौता करने का श्रेय जाता है, वहीं ओबामा ने फिलहाल अपना ध्यान अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान पर केंद्रित किया है.

लेकिन अमरीका को पता है कि वो भारत की अनदेखी नहीं कर सकता.

हिलेरी क्लिंटन अपनी मुलाक़ातों में भारतीय नेताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश करेंगी कि ओबामा प्रशासन भी भारत के साथ उतनी ही नजदीकी चाहता है, जितनी कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश के जमाने में थीं.

बुश प्रशासन ने पिछले साल भारत के साथ असैन्य परमाणु क़रार किया था और इसके साथ ही परमाणु व्यापार पर भारत पर तीन दशक से चल रहा प्रतिबंध खत्म हो गया.

भारत और अमरीका के बीच रिश्तों की कुंजी अर्थव्यवस्था से जुड़ी है. अमरीका व्यापार में भारत का सबसे बड़ा साझीदार है. अमरीका का भारत में लगभग 1,000 करोड़ डॉलर का निवेश है.

इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था भी अमरीका पर आश्रित है और पिछले साल भारत ने अमरीका से 370 करोड़ डॉलर का व्यापार किया.

उम्मीदें

उम्मीद की जा रही है कि अपने दौरे में हिलेरी क्लिंटन में कुछ अहम घोषणाएँ भी कर सकती हैं. इसमें अमरीकी कंपनियों द्वारा तैयार किए जाने वाले दो परमाणु संयंत्रों की घोषणा शामिल है.

भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई की ताज़ा रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अगले 10-15 साल में भारत 24 परमाणु रिएक्टर आयात करेगा. इस परमाणु व्यापार से अमरीका में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 हज़ार नई नौकरियां मिलेंगी.

इसके अलावा भारत अपनी वायु सेना में सोवियत संघ के जमाने के लड़ाकू विमानों की जगह नए लड़ाकू विमान शामिल करना चाहता है. अरबों रुपए के इस सौदे को पाने की होड़ में ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस के अलावा अमरीका भी शामिल हैं.

परमाणु अप्रसार, जलवायु परिवर्तन और नई विश्व व्यापार संधि पर ओबामा प्रशासन भारत का सहयोग चाहता है. फिलहाल इन तीनों ही मुद्दों पर अमरीकी रुख़ से भारत के मतभेद हैं.

भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया है. भारत का कहना है कि ये संधि भेदभावपूर्ण है क्योंकि इससे परमाणु संपन्न देशों पर निशस्त्रीकरण का दबाव नहीं बनता.

ओबामा प्रशासन इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ है कि भारत को भरोसे में लिए बग़ैर वो इन तीनों ही मोर्चों पर आगे नहीं बढ़ सकता.

हिलेरी क्लिंटन की कोशिश होगी कि भारतीय नेताओं के साथ मुलाक़ात में वो भारत को पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता फिर शुरू करने के लिए मना सकें.

ओबामा प्रशासन को पता है कि चरमपंथी संगठन अल क़ायदा के ख़िलाफ़ उसे अफ़ग़ानिस्तान में सफलता तभी मिल सकती है अगर भारत-पाकिस्तान सीमा पर शांति रहे और पाकिस्तानी सेना अफ़ग़ान सीमा पर चरमपंथी गतिविधियों पर रोक लगाने में अमरीकी सुरक्षा बलों को मदद कर सकें.

पिछले साल मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता पटरी से उतर गई थी.

कुल मिलाकर ज़बर्दस्त लोकप्रियता के बावजूद हिलेरी क्लिंटन के लिए ये दौरा किसी इम्तहान से कम नहीं होगा और इससे ये भी साफ़ हो जाएगा कूटनीतिक क्षेत्र में वो कितनी पारंगत हैं.

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