समलैंगिकता पर रोक लगाने से इनकार

समलैंगिक समर्थक
Image caption दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को समलैंगिक संबंधों के पक्षधरों ने अपनी जीत बताया था

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाने के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से आठ हफ़्ते में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार का रुख़ जानना चाहा है.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए वयस्कों के बीच सहमति से बनने वाले समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से मुक्त कर दिया था.

हालाँकि अदालत ने धारा 377 को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया था.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक नहीं लगाई है.

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और नाज़ फ़ाउंडेशन को नोटिस जारी किया था.

ग़ौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट का फ़ैसला नाज़ फ़ाउंडेशन की याचिका पर ही आया था.

नाज़ फ़ाउंडेशन ने 2001 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को चुनौती दी थी. नाज़ फ़ाउंडेशन एक ग़ैर सरकारी समाजसेवी संस्था है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि हाई कोर्ट के फ़ैसले पर अंतरिम आदेश की ज़रूरत हुई तो संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा.

इस फ़ैसले को चुनौती देनेवाले याचिकाकर्ता सुरेश कुमार कौशल का कहना था, "ये तर्क दिए जा रहे हैं कि आम भारतीय दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले से सहमत है, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि कितने लोगों ने समलैंगिकता से जुड़े सलावों को लेकर भारत के गाँव का दौरा किया है और उनका मत जानना चाहा है?"

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