आरोपों के बावजूद 'ईनाम'

रीता जोशी
Image caption बलात्कार की शिकार हुई महिलाओं को संबोधित करते हुए रीता जोशी की टिप्पणी के बाद ये विवाद पैदा हुआ

बहुजन समाज पार्टी के नेता इंतज़ार आब्दी पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रीता जोशी का मकान जलाने के आरोप लगने के बावजूद उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देते हुए लाल बहादुर गन्ना किसान संस्थान का अध्यक्ष बनाया गया है. उधर रीता जोशी ने राज्य की मुख्यमंत्री मायावती से अपनी जान को ख़तरा होने की बात कही है.

रीता जोशी ने नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री मायावती के त्यागपत्र की मांग भी की है.

रीता जोशी के लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बगल स्थित घर पर पंद्रह जुलाई की रात आग लगाई गई थी. उसी दिन उन्हें मुरादाबाद में मुख्यमंत्री के बारे में अपमानजनक भाषण देने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

'ईनाम दिया गया'

उधर गन्ना संस्थान के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि 'आब्दी की नियुक्ति का आदेश कल रविवार को मिला और आब्दी लालबत्ती गाड़ी में बैठकर घूम रहे हैं.'

आब्दी के एक समर्थक कब्बन नवाब ने पत्रकारों को बताया कि 'मुख्यमंत्री मायावती ने आब्दी को उनके कार्यों के लिए ईनाम दिया है.'

दूसरी ओर कांग्रेस नेता इसे जले पर नमक छिड़कने की संज्ञा दे रहे हैं.

रीता जोशी ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "हम उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री मायावती पर आरोप लगाते हैं कि सचिवालय के बगल में उनके घर के करीब इतना बड़ा तांडव डेढ़ घंटे तक होता रहा और पुलिस खड़ी तमाशबीन बनी रही, तेल देकर आगजनी करवाती रही. नैतिकता के आधार पर तो अब मुख्यमंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.''

Image caption बहुजन समाज पार्टी जोशी के घर जलाए जाने के आरोपों का लगातार खंडन करती आई है

रीता जोशी ने बहुजन समाज पार्टी के नेता इंतज़ार आब्दी पर इस अग्निकांड से संबंधित होने के आरोपों के बावजूद उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने की निंदा की है.

उन्होंने कहा, "अब आज के बाद मुझे अपनी सुरक्षा के बारे में गंभीर खतरा है क्योंकि जो मेरे घर पर हमला करवा सकते हैं वो मुझपर भी हमला करवाने में कोई कसर न छोडेंगे. लेकिन मैं डरने वाली नही हूँ."

रीता जोशी अपना जला हुआ घर देखने गईं और वहां भावुक होकर रो पडीं.

वो जब दिल्ली से लखनऊ पहुँची तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चारबाग स्टेशन पर उनका ज़ोरदार स्वागत किया.

अंतरिम ज़मानत

रीता जोशी ने अपने विवादास्पद बयान के लिए खेद प्रकट किया था मगर मुख्यमंत्री मायावती का कहना था कि उनका अपराध माफ़ी योग्य नही है.

कोर्ट ने श्रीमती जोशी को 29 जुलाई तक अंतरिम जमानत दे दी है. उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ भड़काऊ भाषण देने तथा दलित उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किए जाने की बात की है.

इस बीच राज्य सरकार ने आगज़नी की जांच राज्य पुलिस की अपराध शाखा सीआईडी से कराने का आदेश दिया है लेकिन कांग्रेस की माँग है कि मामले की जांच केंद्रीय जाँच ब्यूरो से कराई जाए.

लेकिन बसपा इस मामले में अपना हाथ होने से लगातार इनकार करती आई है. मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि आग स्वयं कांग्रेस के लोगों ने लगाई थी.

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