उमर का इस्तीफ़ा नामंज़ूर

भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने गुरूवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया है.

Image caption उमर अब्दुल्लाह ने मुख्य मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था

विपक्ष के एक विधायक मुज़फ़्फ़र हुसैन बेग की ओर से गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंप दिया था. एक सरकारी प्रवक्ता ने गवर्नर एनएन वोहरा के हवाले से कहा कि विधान सभा में उमर अब्दुल्ला पर लगाए जाने वाले इलज़ाम की गृह मंत्रालय ने जाँच की है और वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ऐसे में मुख्यमंत्री को अपने पद से हटने की कोई ज़रूरत नहीं है.

उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि वे शुक्रवार को दफ़्तर आएंगे.

उन्होंने कहा, "राज्यपाल की ओर से मुझे ये बताया गया है कि मंगलवार को मेरे ख़िलाफ़ लगाए गए इलज़ाम में सच्चाई नहीं है." राज्यपाल ने उमर अब्दुल्ला से 'मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी को गंभीरता से निभाने' की सलाह दी है.

उमर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि ये पत्र उन लोगों के लिए सबक़ हैं जो सरकार को कमज़ोर करना चाहते हैं. वे लोग बुनियादी तौर पर जनता के विरोधी हैं."

इलज़ाम

इससे पहले गवर्नर हाउस से मिले आधिकारिक बयान में कहा गया था कि उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से अनुरोध किया गया था कि वे 'पीडीपी विधायक के आरोपों की समयबद्ध जाँच कराएँ और यदि वे संतुष्ट हैं कि उन आरोपों का कोई आधार है तो तत्काल उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लें.'

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के मुज़फ़्फ़र बेग ने मंगलवार को दो साल पहले 2006 में राज्य में हुए एक सेक्स कांड की जाँच में उमर अब्दुल्ला के नाम आने का आरोप लगाया था. बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने सेक्स कांड मामले में दो सूचियाँ बनाई थीं. एक सूची उन अभियुक्तों की है जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई चल रही है. दूसरी सूची उन लोगों की है जिनके नाम जाँच के दौरान सामने आए और उस सूची में उमर अब्दुल्ला का नाम भी है. ये दूसरी सूची सीबीआई अदालत को सौंप चुकी है." पीडीपी ने इस सारे मामले पर काफ़ी शोर मचाया और पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने तो ये भी मानने से इनकार कर दिया कि उमर अब्दुल्ला ने कोई इस्तीफ़ा दिया है.

उनका कहना था कि जब इस्तीफ़ा दिया ही नहीं गया तो राज्यपाल के पास नामंज़ूर करने के लिए क्या था.

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