अलगाववादियों पर भड़के उमर

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने राज्य के अलगाववादी नेतृत्व की कड़ी आलोचना की है.

Image caption उमर अब्दुल्लाह ने अलगाववादी नेताओं की राजनीति पर सवाल उठाया

मामला शोपियां ज़िले में एक व्यक्ति और उसके तीन साल के बच्चे की मौत का है, जो चरमपंथी हमले में मारे गए थे.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह का कहना है कि अलगाववादी नेता इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि अलगाववादी नेता 'पाखंड की राजनीति' कर रहे हैं.

उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "अगर सुरक्षाकर्मी ये अपराध करते या वो बच्चा सेना की गाड़ी के नीचे आ जाता, तो ये लोग इस पर ख़ूब शोर करते. लेकिन इन लोगों ने तीन साल के एक बच्चे की मौत पर एक शब्द बोलना भी उचित नहीं समझा."

उन्होंने कहा कि अब शोपियाँ चलो, लाल चौक चलो का नारा क्यों नहीं दिया जा रहा है, इस नृशंस हत्या पर हड़ताल का आह्वान क्यों नहीं किया जा रहा है.

जवाब

उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि लोग इन अलगाववादी नेताओं से इस चुप्पी का जवाब मांग रहे हैं.

इस बीच उमर अब्दुल्लाह की इस कड़ी टिप्पणी से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) के प्रमुख यासीन मलिक ने शोपियां ज़िले की घटना की निंदा की.

उन्होंने मांग की कि इस घटना के दोषियों को सज़ा मिले, चाहे वो जो भी हों. यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के उन आरोपों को ख़ारिज किया कि कश्मीर के अलगाववादी नेता आम नागरिकों की हत्या की आलोचना करने में अलग-अलग मानदंड अपनाते हैं.

उन्होंने कहा, "जब वंदहामा में कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी, तो हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने इसके ख़िलाफ़ हड़ताल की थी. इसी तरह संगरामा में मारे गए कश्मीरी पंडितों के अंतिम संस्कार में मैंने हिस्सा लिया था."

यासीन मलिक ने कहा कि पिछले साल भी उन्होंने डोडा में हिंदुओं की हत्या के ख़िलाफ़ दिनभर का धरना दिया था.

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