बस-टैक्सी हड़ताल ख़त्म

पश्चिम बंगाल की राजधानी और भारत के तीसरे सबसे बड़े शहर कोलकाता में निजी बस और टैक्सी चालकों ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु की थी जिसका दिन भर ख़ासा असर दिखा. लेकिन शुक्रवार शाम को बस-टैक्सी चालकों ने इसे ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

Image caption कोलकाता में निजी बसों और टैक्सियों की संख्या कोई 80 हज़ार है

दिन भर हालांकि ऑटोरिक्शा और सरकारी बसें सड़कों पर थे और मेट्रो रेल भी चल रही थी लेकिन इस हड़ताल का असर व्यस्त कोलकाता पर स्पष्ट दिखा.

निजी ट्रांसपोर्टर पश्चिम बंगाल सरकार के उस निर्णय का विरोध कर रहे थें जिसमें वह हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को अगले महीने यानी अगस्त से सड़कों से हटाने जा रही है.

हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला प्रदूषण कम करने की दृष्टि से लिया था.

यह फ़ैसला एक अध्ययन के बाद आया था जिसमें कहा गया था कि एक करोड़ 80 लाख की जनसंख्या वाले कोलकाता शहर में लगभग 70 प्रतिशत लोग श्वास संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं. इन बीमारियों में फेफड़े का कैंसर, अस्थमा और सांस लेने में दिक़्कत शामिल हैं.

निजी बसों और टैक्सियों के मालिकों का कहना है कि एक तो उन्हें पुराने वाहनों को सड़क से हटाने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए और दूसरे नए वाहन ख़रीदने के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध करवाना चाहिए.

लेकिन पर्यावरणविद कहते हैं कि यह मामला अदालत में कई वर्षों से चल रहा है और वाहन मालिकों को पर्याप्त समय दिया जा चुका है.

सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना था कि बस-टैक्सी मालिकों ने शुक्रवार शाम को तय किया कि वे क़ानूनी कार्रवाई लड़ेगे और सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देंगे.

उनका कहना था शायद इन लोगों ने देख लिया है कि चाहे इनकी हड़ताल असरदार रही है लेकिन वह इन्हें लोगों में लोकप्रिय नहीं बना रही है इसलिए अन्य विकल्प खोजने की ज़रूरत है.

कोलकाता में निजी बसों, मिनी बसों और टैक्सियों की संख्या 80 हज़ार के क़रीब है.

सुबीर भौमिक का कहना है कि गुरुवार को निजी ट्रांसपोर्टरों की एसोसिएशन के साथ बातचीत विफल हो जाने के बाद ही राज्य के परिवहन मंत्री सुभाष चक्रवर्ती ने स्पष्ट कर दिया था कि सरकार के पास हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के अलावा कोई चारा नहीं है.

निजी बसों और टैक्सियों के मालिकों ने मंत्री के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की लेकिन मंत्री का कहना था कि इस बातचीत के विफल होने का कारण भी वही लोग हैं.

परिवहन मंत्री सुभाष चक्रवर्ती ने चेतावनी दी थी कि यदि हड़ताल जारी रहती है तो सरकार कड़े क़दम उठाएगी. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया था कि ये कड़े क़दम क्या हो सकते हैं.

इस बीच सरकार ने सरकारी बसों की संख्या बढ़ा दी थी और ऑटोरिक्शा भी पूर्ववत चल रहे थे लेकिन कोलकाता में हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हुआ.

मज़दूर संगठन सीटू के प्रमुख काली घोष ने घोषणा की थी कि उनका संगठन इस हड़ताल का समर्थन नहीं कर रहा.

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