फिर आंदोलन की राह पर गूजर

किरोड़ी सिंह बैंसला
Image caption बैंसला और मुख्यमंत्री की मुलाक़ात नहीं हो सकी.

राजस्थान में गूजर नेताओं ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा इसके अनुरुप आरक्षण देने की माँग पर 26 जुलाई से फिर बड़ा आंदोलन शुरु करने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गूजर नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया लेकिन वे बातचीत छोड़ कर चले गए. सरकार ने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ज़िम्मेदार ठहराया है.

उधर भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को विधानसभा को धरना दिया और इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण की माँग की.

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने करौली ज़िले में रविवार से बेमियादी महापंचायत शुरु करने की घोषणा कर दी है.

राज्य सरकार ने बैंसला को जयपुर बुलाया था जहां गृह मंत्री शांति धारीवाल से उनकी बात भी हुई और शुक्रवार को वह मुख्यमंत्री गहलोत मिलने वाले थे लेकिन बीच में ही वे जयपुर से रवाना हो गए.

Image caption दो साल पहले गूजर आंदोलन में सत्तर लोग मारे गए थे.

धारीवाल ने बातचीत न होने के लिए भाजपा को ज़िम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है, "भाजपा के लोगों ने रात को उन्हें भड़का दिया और रवाना कर दिया. सुबह नौ बजे बात होनी थी. हमारी मंशा साफ़ है. हम पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लिए तैयार हैं."

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने गूजरों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी. अब विपक्ष में बैठीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गूजर आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा में धरना दिया और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा.

वो कहती हैं, "जिस आरक्षण के ऊपर हम पिछले दो साल से और अभी भी आवाज़ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उस पर ये सरकार चुप है. मुझे ज्यादा नहीं कहना. यहां तो मंत्री ऐसे हैं जो जवाब भी नहीं दे सकते."

दो साल पहले आरक्षण आंदोलन ने 70 लोगों की बलि ले ली थी और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था.

लेकिन दो साल बाद भी मुद्दे और नेता वहीं खड़े हैं जहां से यात्रा शुरु हुई थी.

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