आरक्षण पर शक्ति परीक्षण की तैयारी

किरोड़ी सिंह बैंसला
Image caption बैंसला और मुख्यमंत्री की मुलाक़ात नहीं हो सकी.

राजस्थान में एक बार फिर गूजर नेताओं ने आरक्षण को लेकर सरकार के साथ शक्ति परीक्षण की तैयारी कर ली है. गूजर नेताओं ने आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.

महापंचायत के बाद उन्होंने फ़ैसला किया कि आरक्षण के बारे में फ़ैसले के लिए वो सरकार को 24 घंटे की मोहलत दे रहे हैं और इस बीच वो महापंचायत के स्थान पर ही बैठे रहेंगे.

वे अपनी बिरादरी के लिए अंतरिम राहत के तौर पर पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं. राज्य सरकार कहती है कि वो इस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत हैं.

मगर सरकार इसके लिए कुछ समय चाहती है ताकि कुछ क़ानूनी उपाय किए जा सकें. पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने गूजरों और कुछ छोटी जातियों को पाँच फ़ीसदी और ऊँची जातियों के गरीब लोगों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का क़ानून बनाकर राज्यपाल के पास भेजा था.

मगर राज्यपाल ने कुछ क़ानूनी विंदुओं का हवाला देते हुए इसे रोक लिया. अब यही मुद्दा गूजर नेताओं और सरकार के बीच विभाजन की रेखा खींच चुका है. क़ानूनि विशेषज्ञों के मुताबिक कोई भी सरकार पचास प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण नहीं दे सकती.

लेकिन गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला कहते हैं कि इसमें कोई क़ानूनी अड़चन नहीं है और सरकार बहाने बना रही है. मगर हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पानाचंद जैन का कहना है,"पचास फ़ीसदी से ज़्यादा आरक्षण तभी संभव है जब सरकार संविधान में संशोधन करे."

रस्साकशी

मगर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं, "हम सैद्धांतिक तौर पर पाँच फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए तैयार हैं. लेकिन सब कुछ संविधान के मुताबिक ही करना होगा. अभी बिल राज्यपाल के पास लंबित है."

वो कहते हैं, "अपनी माँग के लिए आंदोलन का अधिकार सभी को है. लेकिन क़ानून को हाथ में लेने की इजाज़त किसी को नहीं है."

विपक्षी भाजपा ने गूजर नेताओं की मांग का समर्थन किया है. भाजपा का कहना है कि इस मुद्दे पर हालात बिगड़ते हैं तो इसके लिए कांग्रेस ज़िम्मेदार होगी. पार्टी के मुताबिक राज्यपाल एसके सिंह ने कांग्रेस के इशारे पर कोई फ़ैसला नहीं किया है.

गूजर नेता बैंसला कहते हैं कि जब दूसरे राज्यों में 50 फ़ीसदी आरक्षण है तो राजस्थान में क्यों नहीं हो सकता. लेकिन रिटायर्ड जस्टिस पानाचंद जैन कहते हैं, "किसी प्रशासनिक आदेश से आरक्षण की सीमा नहीं बदली जा सकती. अगर ऐसा हुआ तो बड़ी मुश्किल होगी. न केवल इंदिरा साहनी बल्कि एम नागराज वाले मामले भी सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा पचास प्रतिशत ही होगी."

बैंसला का कहना है कि पांच प्रतिशत आरक्षण तो तात्कालिक मांग है, हम तो जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं.

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