गूजर नेताओं का आरक्षण पर अल्टीमेटम

किरोड़ी सिंह बैंसला
Image caption गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं

राजस्थान में गूजर नेताओं ने रविवार को आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. ये अल्टीमेटम सोमवार को समाप्त हो रहा है.

ये फ़ैसला करौली जिले के पेंचल गाँव में आयोजित महापंचायत में लिया गया.

महापंचायत के बाद गूजर नेताओं ने कहा कि आरक्षण के बारे में फ़ैसले के लिए वो सरकार को 24 घंटे की मोहलत दे रहे हैं और इस बीच वो महापंचायत के स्थान पर ही बैठे रहेंगे.

इस आंदोलन का नेतृत्व गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला कर रहे हैं.

गूजर नेताओं का कहना है कि फ़ैसले के बाद वे हिंडौन कस्बे का रुख़ करेंगे. यहाँ से दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग गुजरता है.

उल्लेखनीय है कि पिछले गूजर आंदोलन के दौरान ये मार्ग बाधित हुआ था. इसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

कुछ इलाक़ों में निषेधाज्ञा भी लागू की गई है. लेकिन इस पंचायत के कारण कई स्थानों पर परिवहन बसों का संचालन प्रभावित हुआ है.

गुजर नेताओं ने पंचायत के लिए ऐसा स्थान चुना है जो उनके लिए काफ़ी सुरक्षित है. पेंचला मोड़ के आसपास गुजरों के दर्जनों गांव है.

आरक्षण की माँग

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना है कि वे अपनी जाति के लिए आरक्षण लेकर रहेंगे.

वे अपनी बिरादरी के लिए अंतरिम राहत के तौर पर पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं.

राज्य सरकार कहती है कि वो इस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत है.

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत कहते हैं, "हम सैद्धांतिक तौर पर पाँच फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए तैयार हैं. लेकिन सब कुछ संविधान के मुताबिक ही करना होगा. अभी बिल राज्यपाल के पास लंबित है."

वो कहते हैं, "अपनी माँग के लिए आंदोलन का अधिकार सभी को है. लेकिन क़ानून को हाथ में लेने की इजाज़त किसी को नहीं है."

दरअसल सरकार इसके लिए कुछ समय चाहती है ताकि कुछ क़ानूनी उपाय किए जा सकें.

पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार ने गूजरों और कुछ छोटी जातियों को पाँच फ़ीसदी और ऊँची जातियों के गरीब लोगों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का क़ानून बनाकर राज्यपाल के पास भेजा था.

मगर राज्यपाल ने कुछ क़ानूनी बिंदुओं का हवाला देते हुए इसे रोक लिया.

अब यही मुद्दा गूजर नेताओं और सरकार के बीच विभाजन की रेखा खींच चुका है.

क़ानून विशेषज्ञों के मुताबिक कोई भी सरकार 50 प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण नहीं दे सकती.

लेकिन गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला कहते हैं कि इसमें कोई क़ानूनी अड़चन नहीं है और सरकार बहाने बना रही है.

विपक्षी भाजपा ने गूजर नेताओं की मांग का समर्थन किया है. भाजपा का कहना है कि इस मुद्दे पर हालात बिगड़ते हैं तो इसके लिए कांग्रेस ज़िम्मेदार होगी.

पार्टी के मुताबिक राज्यपाल एसके सिंह ने कांग्रेस के इशारे पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं किया है.

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