मुंबई विस्फोट मामले में तीन दोषी क़रार

मुंबई में 2003 का विस्फोट
Image caption वर्ष 2003 में मुंबई का झावेरीबाज़ार इलाक़ा और गेटवे ऑफ़ इंडिया निशाना बनाए गए थे

मुंबई में वर्ष 2003 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में सोमवार को पोटा की एक विशेष अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है.

पोटा की विशेष अदालत ने सोमवार को फ़ैसला सुनाते हुए तीन अभियुक्तों, मोहम्मद हनीफ़, उनकी पत्नी फ़हमीदा और एक अन्य अभियुक्त अशरत अंसारी को वर्ष 2003 के मुंबई धमाकों की साजिश रचने, लोगों के बीच दहशत फैलाने और 54 लोगों की हत्या का दोषी करार दिया है.

वर्ष 2003 में मुंबई के झावेरीबाज़ार इलाके और गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास हुए दो विस्फोटों में 25 अगस्त के दिन कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई थी. धमाकों में 240 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे.

सरकारी वकील उज्जवल निकम ने बताया कि इन दोषियों के हाथ चरमपंथी संगठन, लश्करे तैयबा से जुड़े होने की बात मानी गई है और यह भी साबित हो गया है कि इन लोगों ने दुबई में बैठकर इन धमाकों की साजिश रची थी.

पर इस फ़ैसले के तहत सज़ा का निर्धारण अभी नहीं किया गया है. अदालत ने इसके लिए चार अगस्त की तारीख तय की है.

अपील की तैयारी

हालांकि अभियुक्तों के वकील ने कहा है कि इस फैसले में कई बातों की अनदेखी हुई है और चार तारीख को सज़ा तय किए जाने के बाद वे इस मामले को हाईकोर्ट में लेकर जाएंगे.

सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि जिन धाराओं के तहत इन लोगों को दोषी करार दिया गया है, उनमें धारा 302 भी शामिल है और इसके तहत दोषी को सज़ा ए मौत या आजीवन कारावास जैसी सज़ा दी जाती है.

उज्जवल निकम ने यह भी कहा कि सरकारी पक्ष चार अगस्त को दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा की दलील रखेगा. उन्होंने यह भी बताया कि यह पहला मामला है जब किसी परिवार में पति, पत्नी और बेटी- तीनों ही एक चरमपंथी साजिश में शामिल पाए गए हैं.

इस परिवार में जहाँ मोहम्मद हनीफ़ और उनकी पत्नी फहमीदा के ख़िलाफ़ मामला चलाया गया है वहीं लड़की की आयु को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने उसपर पोटा क़ानून के तहत मामला न चलाने का फैसला लिया था.

सरकारी वकील ने बताया कि इन लोगों ने पाकिस्तान के कुछ लोगों से दुबई में मुलाक़ात की थी और वर्ष 2002 में दो दिसंबर के दिन एक बम विस्फोट की नाकाम कोशिश की थी. इसके बाद 28 जुलाई,03 को अभियुक्तों ने एक लोकल बस में बम विस्फोट किया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई.

पर इससे ये संतुष्ट नहीं थे. इन्होंने एक बड़ी साजिश रची और इसके बाद 25 अगस्त, 03 को मुंबई धमाकों से दहल उठी थी. 54 लोगों की मौत हो गई थी और 244 लोग घायल हो गए थे.

उन्होंने कहा कि दोषियों में से एक सरकारी गवाह बन गया. उसकी पहचान को गुप्त रखा गया है.

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