बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा

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Image caption निजी स्कूलों में भी कमजोर तबकों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार हासिल हो जाएगा

लोक सभा में 'बच्चों के लिए मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा विधेयक 2008' गुरुवार को पेश किया जाएगा.

इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद छह से 14 साल के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार हासिल हो जाएगा.

राज्यसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है.

इस विधेयक के प्रावधानों के तहत केंद्रीय विद्यालय समेत सभी निजी और सरकारी स्कूलों की 25 फ़ीसदी सीटें कमजोर तबकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी.

इसके अनुसार सरकारी स्कूल में बच्चे की पढ़ाई पर आने वाले खर्च के हिसाब से निजी स्कूलों को इसके एवज में सरकार अपनी ओर से भुगतान करेगी.

विधेयक पर सवाल

इस विधेयक पर सवालों के जवाब में राज्यसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि शिक्षा क्षेत्र में नई क्रांति लाने की ज़रूरत है और ये विधेयक उसी दिशा में है.

कपिल सिब्बल का कहना था कि विधेयक पास हो जाने के बाद सभी बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकार की होगी.

लेकिन प्रस्तावित क़ानून की तारीफ़ भी हो रही है और उस पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं.

आलोचकों का कहना है कि मुफ़्त शिक्षा का अधिकार दिलाने पर आने वाले खर्च और जवाबदेही को लेकर प्रस्तावित क़ानून में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई हैं.

शिक्षाविद् अनिल सदगोपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में छह से 14 साल की उम्र के क़रीब 20 करोड़ बच्चे हैं जिनमें से चार करोड़ बच्चे निजी स्कूलों में हैं.

इनमें से सिर्फ़ 25 फ़ीसदी यानी चार करोड़ में से सिर्फ़ एक करोड़ बच्चों को मुफ़्त शिक्षा का अधिकार मिल पाएगा.

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