राज्यसभा के लिए जद (यू) से जॉर्ज

जॉर्ज फ़र्नांडीस

जो लोग यह देख सुन चुके हैं कि जनता दल (यूनाइटेड) से जॉर्ज फ़र्नांडीस को अलविदा कह दिया गया था, वो इस ख़बर को सुनकर चौंक सकते हैं कि अब जॉर्ज को इसी पार्टी ने राज्यसभा की सदस्यता के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है.

समता पार्टी से लेकर जद (यू) तक के केंद्रीय नेतृत्व में शीर्ष पद पर रह चुके जॉर्ज फ़र्नांडीस की हालत यह हो चुकी थी कि पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी अपनी पार्टी ने ही उन्हें सांसद पद के लिए उम्मीदवार बनाने से भी वंचित कर दिया था. नतीजतन वो निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव हार भी गए.

इतना ही नहीं, जद (यू) के सूत्रधार नीतीश कुमार ने शरद यादव को दल का केंद्रीय नेतृत्व सौंपकर जॉर्ज फ़र्नांडीस को इस तरह से किनारे लगा दिया था कि पटना में पार्टी कार्यालय से जॉर्ज साहब की तस्वीर तक हटा दी गई.

नीतीश जार्ज टकराव कोई छिपी हुई बात नहीं रह गई थी और इस बात को जॉर्ज साहब खुलेआम ज़ाहिर भी करते थे.

तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों को चौंकाते हुए जॉर्ज फ़र्नांडीस को बुधवार की रात दिल्ली से पटना बुलाया और गुरुवार को यहाँ से राज्यसभा के लिए उनका नामांकन पत्र भी दाखिल करा दिया.

याद रहे कि जॉर्ज फ़र्नांडीस की कथित जर्जर शारीरिक अवस्था को आधार बनाकर उन्हें मुजफ़्फ़रपुर से पार्टी ने लोकसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया था.

बुधवार रात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं हवाई अड्डे पहुँचकर जॉर्ज फ़र्नांडीस को संभालते हुए गाड़ी में बैठाया और होटल तक पहुंचाया.

राजनीतिक दांव-पेंच या उठापटक वाले दौर से गुज़रे अपने ही दल के इन दो बड़े नेताओं का ऐसा हृदय परिवर्तन देखकर इस पार्टी के अन्य लोग भी अचंभित हैं.

नीतीश-जॉर्ज प्रेमकथा

अब ज़रा ग़ौर कीजिए कि दरअसल हुआ क्या है... ये तो ज़ाहिर है कि जॉर्ज फ़र्नांडीस के प्रति नीतीश कुमार के राजनीतिक व्यवहार को पूरे राजनीतिक महकमे ने दुर्व्यवहार क़रार दिया था.

नीतीश जी शायद इसी कारण से अपने बुज़ुर्ग नेता की तरफ़ से आशंकित बददुआ जैसा कोई बोझ अपने मन से उतारना चाह रहे होंगे.

दूसरी और सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कि इस बार राज्यसभा में शरद यादव द्वारा खाली की गई सीट के कई प्रबल दावेदार नीतीश कुमार की पार्टी में सामने खड़े हो गए हैं.

शरद यादव जब लोकसभा की मधेपुरा सीट से जीत गए तो उनके इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट पर नज़र गड़ाने वालों में प्रभुनाथ सिंह जैसे जद (यू) नेता भी शामिल थे.

इसी दबाव को एक झटके में दूर करने की रणनीति के तहत भी ये जॉर्ज-नीतीश वाली प्रेमकथा रची गई है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बाबत अपनी प्रतिक्रिया में भी जो कहा है, वो कम रोचक नहीं है.

नीतीश कुमार कहते हैं, "जॉर्ज साहब के प्रति आदर भाव मेरे मन में कभी गया कहाँ था. मैंने तो पहले ही कह दिया था कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजना चाहती है. जहाँ तक बात सरप्राइज़ की है तो सरप्राइज़ जितना गहरा हो, उतना ज़्यादा मज़ा देता है."

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