'नगा वार्ता का दायरा भारतीय संविधान'

जीके पिल्ले
Image caption पिल्ले ने लगभग एक महीना पहले भारत के गृह सचिव का कार्यभार संभाला है

भारत के गृह सचिव जीके पिल्ले ने कहा है कि नगालैंड के संदर्भ में जो कुछ भी तय होगा वह भारतीय संविधान के दायरे में ही होगा और इस पर बहस नहीं हो सकती है. उनका मानना है कि कई वर्षों से भारत सरकार के साथ वार्ता कर रहे अलगाववादी गुट भी अब ये बात समझते हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछले 12 साल से नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम के दो गुटों ने भारतीय सेनाओं के साथ संघर्षविराम बनाए रखा है और भारत सरकार के साथ वार्ता कर रहे हैं.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में भारतीय गृह सचिव जीके पिल्ले ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बातचीत भारत के संविधान पर ही हो रही है और एनएससीएन ने इस बारे में यूरोप के संविधान विशेषज्ञों से मदद ली है.

संविधान में पर्याप्त लचीलापन'

उनका कहना था, "एनएससीएन ने भारतीय संविधान को समझने का प्रयास किया है और यह देखने की कोशिश की है कि संविधान किस तरह से उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है. उनका कहना है कि वे संविधान को बेहतर समझते हैं और हमसे फिर बात करेंगे. उन्होंने अपने भी कुछ प्रस्ताव दिए हैं जिनपर भारत सरकार कुछ महीनों में अपनी प्रतिक्रिया देगी. जो कुछ भी तय होगा वह भारतीय संविधान के दायरे में ही होगा और इस पर बहस नहीं हो सकती है. मेरा मानना है कि अलगाववादी गुट भी अब ये बात समझते हैं."

उनका कहना था कि संविधान में पर्याप्त लचीलापन है जो राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं पर नगा गुटों की भावनाओं का ख़्याल रख सके. जब उनसे पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में चल रहे आंदोलनों और अलगाववादी संघर्ष के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इन सभी राज्यो के गुटों के साथ एक-साथ समग्र बातचीत नहीं हो सकती क्योंकि इनका इतिहास, माँगे अलग-अलग हैं. उनका कहना था कि कहीं स्वायत्ता की माँग है तो कहीं स्वतंत्रता की..

गृह सचिव जीकी पिल्ले का कहना था कि मणिपुर के मामले में वर्ष 1969 तक तो कोई विद्रोह था ही नहीं और अब मैती गुट के साथ वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. उनका मानना था कि मणिपुर में लोग शांति के लिए उत्सुक हैं और जानते हैं कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होना वाला है. यूनाइटेड लिब्रेशन फ़्रंट ऑफ़ असम के बारे में पूछे जाने पर पिल्ले का कहना था कि असम भारत के विचार से बहुत ही महत्वपूर्ण राज्य है और पूर्वोत्तर में सबसे अहम राज्य है. उनका कहना था कि असम में आर्थिक विकास और शांति दोनों ही ज़रूरी हैं और ये देखा गया है कि जब बातचीत शुरु हो जाती है तो हिंसा अपने आप घट जाती है क्योंकि कोई भी बातचीत और लड़ाई एक साथ नहीं करता है.