पाकिस्तान में न्यायिक फ़ैसले का परिणाम

मुशर्रफ़
Image caption राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के आपातकाल लागू करने के फ़ैसले को ग़ैरक़ानूनी ठहराया गया

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुनाया है कि तीन नवंबर 2007 को उस समय के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का आपातकाल लगाने और जजों को बर्ख़ास्त करने के फ़ैसला असंवैधानिक है.

इस आदेश के बाद पाकिस्तान में न्यायपालिका, उस समय नियुक्त हुए जजों, उनके किए गए फ़ैसलों और पाकिस्तान में परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य को लेकर कई अहम सवाल उठाए जा रहे हैं.

क्या आपातकाल के समय नियुक्त जजों के द्वारा किए गए फ़ैसलों पर अब सवालिया निशान लग गया है?

बीबीसी की उर्दू सेवा के प्रमुख आमिर अहमद ख़ान से बातचीत में बीबीसी संवाददाता राजेश प्रियदर्शी ने इस फ़ैसले के पाकिस्तान की राजनीति और न्यायपालिका पर संभावित असर जानने का प्रयास किया.

आमिर अहमद का कहना है कि ये संभव है कि लोग उस समय लिए गए न्यायिक फ़ैसलों पर पुनर्विचार के लिए याचिकाएँ दायर करें.

'सिद्धांत कायम करना'

उनका कहना है, "पाकिस्तान क़ानूनी और संवैधानिक पेचीदगियों से भरा हुआ है. हालाँकि जब पूर्व में लिए गए किसी फ़ैसले पर आदेश सुनाया जाता है तो उसका मक़सद वक़्त का मुँह मोड़ना नहीं बल्कि एक उसूल कायम करना होता है. इसका मक़सद होता है ये तय करना कि पहले जो फ़ैसला लिया गया था क्या वह सही था, क्या भविष्य में भी उसी के तहत फ़ैसले लिए जा सकते हैं? और ये भी स्पष्ट करना कि यदि वह फ़ैसला सही नहीं था तो उसके आधार पर अहम राजनीतिक, क़ानूनी और संवैधानिक फ़ैसले नहीं लिए जाने चाहिए."

आमिर अहमद ख़ान का कहना है कि जब ये न्यायिक आदेश नहीं सुनाया गया था तब भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि 'क्या आने वाले फ़ैसले का इस्तेमाल कर उन जजों को बर्ख़ास्त किया जाएगा जो एक तानाशाह के फ़ैसले के तहत नियुक्त किए गए थे? क्या पूर्व राष्ट्रपतिपरवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई संभव होगी?'

वे कहते हैं, "अब मिल रही जानकारी के मुताबिक ऐसे संकेत हैं कि आपातकाल के दौरान नियुक्त किए गए जजों को बर्ख़ास्त किया जाएगा. लेकिन जहाँ तक परवेज़ मुशर्रफ़ का सवाल है, वे आजकल लंदन में हैं और पाकिस्तान की सरकार के पास कोई ज़रिया नहीं है कि उन्हें वापस ला सके. इसलिए फ़िलहाल वे सुरक्षित महसूस कर सकते हैं."

बीबीबसी के उर्दू सेवा प्रमुख का कहना है कि फ़िलहाल ये स्पष्ट तौर पर कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की क़ानूनी, संवैधानिक और राजनीतिक दिशा क्या होगी.

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