झारखंड सूखाग्रस्त घोषित

बारिश न होने के कारण सूखे की मार खेल रहे झारखंड को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है.

Image caption झारखंड में पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई है

राज्य के नए राज्यपाल के शंकर नारायणन के सलाहाकार परिषद ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.

इस बार राज्य में मानसून न सिर्फ़ देर से आया बल्कि जितनी बारिश होनी थी उसकी एक चौथाई भी नहीं हुई.

इससे पहले राज्य के मात्र 11 ज़िले ही सूखाग्रस्त घोषित किए गए थे. कैबिनेट सचिव पीके जाजोरिया ने बताया कि समय पर मानसून के नहीं आने से न तो बुआई हो पाई और कहीं-कहीं पर अगर बारिश हुई भी तो फसलें बर्बाद हो गईं.

सूखे का सबसे ज़्यादा दंश झेल रहे हैं झारखंड के संथाल परगना और पलामू प्रमंडल में पड़ने वाले ज़िले क्योंकि यहाँ के किसान केवल काश्तकारी पर निर्भर हैं.

फसलों के बर्बाद होने और बारिश नहीं होने के कारण कुछ इलाक़ों में तो अकाल जैसी स्थिति हो गई है. ख़ास तौर पर पलामू और संथाल परगना प्रमंडलों के सुदूर इलाक़ों में तो लोगों ने कई महीनों से अनाज के दर्शन नहीं किए हैं.

बारिश नहीं

वैसे तो यहाँ मानसून 10 जून तक आ जाता है, लेकिन इस बार मानसून की बारिश के पहुँचते-पहुँचते 28 जून हो गया और उस पर भी पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई.

मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बार केवल एक चौथाई ही वर्षा हो पाई है जिसकी वजह से हालात गंभीर बने हुए हैं.

कई इलाक़ों में किसानों के हुजूम राष्ट्रीय राजमार्गों पर फावड़े लेकर बैठे रहते हैं ताकि किसी तरह उन्हें कोई रोज़गार मिल जाए और वो अपना और अपने परिवारवालों का पेट भर सकें.

कल-कारखानों के नहीं होने से और रोज़गार के दूसरे संसाधनों के अभाव में इनमें से ज़्यादातर ग्रामीणों के हाथ निराशा ही लगती है.

बारिश के नहीं होने से पैदा हुई परिस्थितियों के मद्देनज़र भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने पलामू और संथाल परगना प्रमंडलों को अकालग्रस्त घोषित करने की मांग की है.

आदेश

झारखंड सरकार के कैबिनेट सचिव पीके जाजोरिया ने बताया कि परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने 12500 नई जन वितरण प्रणाली की दुकानें खोलने का आदेश जारी किया है.

इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक ज़िला और अनुमंडल मुख्यालयों में एक-एक हज़ार मिट्रिक टन की क्षमता वाले अनाज के 17 गोदाम खोले जाएँगे.

साथ ही 106 प्रखंड मुख्यालयों में 250 मिट्रिक टन की क्षमता वाले अनाज के गोदाम खोले जाएँगे.

पलामू ज़िले के उपायुक्त अमिताभ कौशल का कहना है कि इन परिस्थितियों में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है भूख से लड़ना और सुदूर ग्रामीण और जंगली क्षेत्रों में अनाज पहुँचाना.

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