'फ़र्जी मुठभेड़' के विरोध में हड़ताल

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में कथित फ़र्जी मुठभेड़ के विरोध में दो दिनों की हड़ताल का आह्वान किया गया है.

Image caption मीडिया रिपोर्ट में संजीत की हत्या का दावा किया गया है

सोमवार से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. इस हड़ताल का आह्वान मणिपुरी छात्रों और युवा संगठनों के एक समन्वय ग्रुप अपुन्बा लुप ने किया है.

ये मामला एक ऐसे पूर्व चरमपंथी चुंगखाम संजीत से जुड़ा हुआ है, जिसने आत्मसमर्पण कर दिया था. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले महीने राजधानी इम्फाल में राज्य विधानसभा के पास बिना किसी उकसावे के संजीत को मार दिया गया.

यही संगठन राज्य में आर्म्ड फ़ोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट के ख़िलाफ़ भी आंदोलन चला रहा है. इस एक्ट के तहत सुरक्षाबलों को चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में विशेष अधिकार मिले हुए हैं.

मांग

अपुन्बा लुप राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के त्यागपत्र की भी मांग कर रहा है. मुख्यमंत्री के पास ही गृह मंत्रालय का भी प्रभार है.

जिस मीडिया रिपोर्ट में संजीत की मौत को फ़र्जी मुठभेड़ बताया गया है, उसमें ऐसे टीवी फुटेज भी दिखाए गए हैं.

इस फुटेज में दिखाया गया है कि संजीत को एक शॉपिंग मॉल में घसीटकर ले जाया जा रहा है और फिर उसके मृत शरीर को एक पुलिस वाहन में रखा जा रहा है.

इस रिपोर्ट के बाद नाराज़ लोगों ने प्रदर्शन किया और पिछले दो दिनों से राजधानी इम्फाल के कुछ हिस्सों में हिंसा भी हुई है.

अपुन्बा लुप के समन्वयक फोलिन्द्रो कोन्सम ने कहा, "ऐसे फ़र्जी मुठभेड़ दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं. पूरे मणिपुर में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएँ भी बढ़ी हैं. मुख्यमंत्री इबोबी सिंह इसके लिए ज़िम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने पुलिस को खुली छूट दे रखी है. इसलिए 23 जुलाई की हत्या की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इबोबी सिंह को त्यागपत्र दे देना चाहिए."

कोन्सम ने कहा कि मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने राज्य की जनता को बार-बार ये कहकर गुमराह किया है कि संजीत पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है और उसने पुलिस पर पहले गोली चलाई.

उन्होंने इस घटना में शामिल पुलिस कमांडो को कड़ी सज़ा देने की मांग की. इस घटना के विरोध में 48 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया गया है. लेकिन जल विभाग, बिजली विभाग और धार्मिक उत्सवों को छूट दी गई है.

अपील

हाल ही में मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत सरकार से सुरक्षा बलों की ओर से जारी हिंसा को ख़त्म करने की अपील की थी.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने आर्म्ड फ़ोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट को भी समाप्त करने की मांग की थी, जिसके कारण वर्षों से सुरक्षाकर्मी अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं.

सरकार ने इस मामले में एक समीक्षा समिति का गठन किया था, जिसने वर्ष 2004 में इसकी सिफ़ारिश की थी कि इस क़ानून को ख़त्म किया जाए. लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई क़दम नहीं उठाया है.

ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया शोधकर्ता मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि मणिपुर की स्थिति ऐसी है, जहाँ क़ानून का शासन ख़त्म हो गया है. आर्म्ड फ़ोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट ख़त्म करने से अपहरण, प्रताड़ना और हत्याओं का दौर ख़त्म होगा और सरकार में लोगों का भरोसा लौटने में मदद मिलेगी.

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