यातायात में परेशानी, प्रदूषण से राहत

पिछले पाँच दिनों से कोलकाता में लाखों लोगों को उमस और गर्मी के बीच बस अड्डों और टैक्सी स्टैंड पर लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ रहा है. सभी को उम्मीद यही है कि शहर की यातायात प्रणाली जल्द ठीक होगी.

एक अगस्त से पुलिस कोलकाता में 1993 से पहले बने वाहनों को ज़ब्त कर रही है. ये आदेश कोलकाता हाई कोर्ट ने दिया था.

कोलकाता की सेवियर एंड फ़्रेंड ऑफ़ इन्वायरमेंट( सेफ़) के सर्वेक्षण के मुताबिक इन वाहनों को ज़ब्त करने के बाद से शहर के पर्यावरण में सुधार हुआ है और पिछले दो दशकों में इतना पर्यावरण इतना स्वच्छ कभी नहीं रहा.

संगठन ने कोलकाता के चार सबसे प्रदूषित ज़ोन में आँकड़े इकट्ठा किए- डनलप क्रॉसिंग, शयामबाज़ार फ़ाइव प्वाइंट क्रॉसिंग, पार्क सर्कस और द रासबिहारी एवेन्यू-एसपी मुखर्जी रोड क्रॉसिंग. इससे पता चला कि हाइड्रोकार्बन के स्तर में 50 फ़ीसदी से अधिक की कमी आई है.

हाइड्रोकार्बन की वजह से ही जिगर, गुर्दे और दिमाग़ को नुकसान पहुँचता है.

प्रदूषण

इसके अलावा ऑक्सीज़न की मात्रा में 15 से 20 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जिस कारण कार्बन डाइऑक्साइड और कॉर्बन मोनोऑक्साइड के प्रतिशत में गिरावट आई.

सेफ़ के अधिकारी सुदिप्तो भट्टाचार्य कहते हैं, "कोलकाता में प्रदूषण का स्तर उतना ही हो गया है जितना बीस साल पहले हुआ करता था. ये अभियान जारी रहना चाहिए और 15 साल से पुराने वाहनों को सड़कों पर नहीं चलने देना चाहिए."

इस सिलसिले में कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले सुभाष दत्ता कहते हैं, "हाइड्रोकार्बन स्तर में आई कमी से साबित होता है कि पुराने वाहनों से ही ज़्यादा प्रदूषण हो रहा था. ये वाहन अधजला ईंधन वातावरण में छोड़ते हैं जिससे हाइड्रोकार्बन ख़तरनाक स्तर तक पहुँच जाते हैं."

लेकिन ऐसे कई वाहन अब भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं जिनसे सबसे ज़्यादा प्रदूषण होता है. इनमें टू-स्ट्रोक पेट्रोल इंजन वाले ऑटोरिक्शा शामिल हैं. कई पुराने ऑटो पर नया रंग किया जा रहा है ताकि पुलिस को धोखा दिया जा सके.

शयामबाज़ार समेत पेंटिंग की कई वर्कशॉप पर पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर चालक हरा रंग करवा रहे हैं ताकि ये लग सके कि ऑटो अब एलपीजी पर चल रहा है.

एक पेंटिंग वर्कशॉप के मालिक राधेश्याम दास मानते हैं, "ये ऑटो दरअसल गैस से नहीं चलते. ऑटोवाले केवल पुलिस को बेवकूफ़ बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. मैं उन्हें मना नहीं कर सकता क्योंकि मेरे पास ये अधिकार नहीं है कि मैं ये देखूँ कि ऑटो गैस पर चल रहा है या पेट्रोल पर."

नियमों का उल्लंघन

पेट्रोल से चलने वाले कई टू-स्ट्रोक ऑटो में अब एलपीजी किट लगवा दी गई है. लेकिन कायदे के मुताबिक इसकी भी मनाही है क्योंकि सरकार ने केवल सिंग्ल स्ट्रोक वाले एलपीजी ऑटो की इजाज़त दी है.

पश्चिम बंगाल सरकार के यातायात सचिव सुमंत्र चौधरी का कहना है कि प्रशासन ने पुराने वाहनों की एक सूची तैयार की है और ये सूची पुलिस को दे दी गई है.

करीब चार हज़ार निजी बसें, 6800 टैक्सी और 65000 ऑटोरिक्शा में से करीब 95 फ़ीसदी ऑटो को सड़कों पर चलाने से कोलकाता होई कोर्ट ने मना कर दिया है.

अध्यापक सुदेशन मजूदमार कहती हैं कि उन्हें लंबी कतारों में खड़े रहकर बस या ग्रीन ऑटो का इंतज़ार करना मंज़ूर है लेकिन वो प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों में नहीं जाएँगी.

कोलकाता हाई कोर्ट ने जुलाई 2008 में शहरी इलाक़ों में ऐसे व्यवसायिक वाहनों के चलाने पर रोक लगा दी थी जो एक जनवरी 1993 से पहले पंजीकृत किए गए हों. इसमें नॉर्थ और साउथ 24 परगनास, हावड़ा और हुगली ज़िले के कई हिस्से शामिल हैं.

ये पाबंदी 31 दिसंबर 2008 से लागू होनी थी लेकिन सरकार ने कुछ समय और माँगा था जिसके बाद समयसीमा 31 जुलाई 2009 कर दी गई थी.

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