कुछ के लिए राहत लाया स्वाइन फ़्लू

स्वाइन फ़्लू
Image caption स्वाइन फ़्लू को लेकर जागरूरता अभियान भी चलाया जा रहा है

स्वाइन फ़्लू से मौत होने के बाद भारत के कुछ शहरों में लोग घबराए हुए हैं और अस्पताल में जांच के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं.

स्वाइन फ़्लू से बचने के लिए नयनतारा मेहरा जैसी दिल्ली की गृहणी ने अपने महीने के राशन में मास्क, ग्लब्स जैसे सामानों को भी शामिल कर लिया है.

नयनतारा के मुताबिक दिल्ली बहुत भीड़ भाड़ वाला शहर है जहाँ आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं इसलिए सावधानी बरतना बहुत ज़रूरी है.

स्वाइन फ़्लू से बचने के लिए सामान की मांग बढ़ने से फार्मेसी वाले काफ़ी खुश हैं.

भारत की एक बड़ी फार्मेसी कंपनी रेलिगेयर वेलनेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल चड्ढा ने बीबीसी को बताया की स्वाइन फ़्लू से बचाने वाली किट बहुत धड़ल्ले से बिक रही है.

बढ़ती चिंताएँ

अभी तक भारत में हालांकि स्वाइन फ़्लू से सिर्फ़ पुणे की 14 साल की रिदा शेख की मौत हुई है लेकिन लोगों की चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं.

अगर विदेशों में स्वाइन फ़्लू का ख़तरा ज्यादा होता गया तो भारत की दवा बनाने वाली कंपनियाँ इससे फ़ायदा उठा सकती हैं.

ये इसलिए भी कि भारत में दवा बनाने का खर्च अमरीका या ब्रिटेन के मुक़ाबले 40 प्रतिशत कम है.

भारत में दवा बनाने की सबसे बड़ी कंपनी रैनबैक्सी के अनुसार ज़रूरत पड़ने पर वो स्वाइन फ़्लू की दवा टैमी फ़्लू का जेनेरिक वर्जन खुद बना सकती है.

रैनबैक्सी के कार्यकारी निदेशक अतुल सोबती ने बीबीसी को बताया की इमर्जेंसी की हालत में यदि ज्यादा लोग आते हैं और आपको उनकी मांगों को पूरा करना पड़ता है तो ऐसा किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने पूरी तैयारी कर रखी है.

अगर स्वाइन फ़्लू और ज्यादा बढ़ता है तो नयनतारा जैसे ग्राहकों को शायद कोई फर्क नहीं पड़ता की दवा कहां से आई है या किसने बनाई है.

किसी की तकलीफ़ से फ़ायदा उठाना शायद कोई पसंद नहीं करेगा लेकिन ये भी सच है कि आर्थिक मंदी के इस दौर में किट और दवा बनाने वाली कंपनियों को इससे थोड़ी राहत ज़रूर मिल सकती है.

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