चिड़ियाघर से बंदर चुरा लिए

बंदर
Image caption चोर दुर्लभ प्रजाति के आठ बंदरों को ले उड़े

रुपए-पैसों, गहनों और दूसरी कीमती वस्तुओं की चोरी तो आम है. लेकिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तो चोरों ने कमाल कर दिया.

उन्होंने रविवार को महानगर के अलीपुर चिड़ियाघर से आठ बंदर चुरा लिए और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.

वह भी कोई ऐसे-वैसे नहीं, बल्कि दुर्लभ प्रजाति के ब्राजीलियाई बंदर थे.

सुबह इस चोरी का पता लगने पर चिडि़याघर के अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए. इस चिड़ियाघर में यह अपनी किस्म की पहली चोरी है.

अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक सुबीर चौधरी बताते हैं,''यह आठों बंदर ब्राजीलियाई नस्ल के थे. दुर्लभ प्रजाति में शुमार इन बंदरों की चोरी के बारे में रविवार को सुबह पता चला.''

रात को दो पहरेदार ड्यूटी पर थे. लेकिन उनमें से किसी को इसकी भनक नहीं लगी. चोरों ने एक पिंजरा काट कर इन बंदरों को चुरा लिया और आराम से बाहर चले गए.

चौधरी बताते हैं कि 'दो फीट कद वाले इन ब्राजीलियाई नस्ल के ऐसे 16 बंदरों को वर्ष 2001 में अलीपुर चिड़ियाघर में लाया गया था. उनमें से कुछ जलवायु रास नहीं आने की वजह से मर गए.'

इस चोरी की शिकायत पुलिस से कर दी गई है. पुलिस को मौक़े पर तैनात पहरेदारों के नाम भी बता दिए गए हैं.

जाँच

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हम इस अनूठे मामले की जांच कर रहे हैं. पहरेदारों से भी पूछताछ की जा रही है. यह पता लगाने के लिए कहीं वे चोरों से मिले तो नहीं थे.

चौधरी कहते हैं कि 'यह मामला अनूठा तो है ही, हमारे लिए ख़तरे का संकेत भी है. वे सवाल करते हैं कि आख़िर तालाबंद पिंजरे से पहरेदारों की जानकारी में आए बिना आठ बंदर किसी ने कैसे चुरा लिए? चोर भीतर घुसे, उन्होंने ताला तोड़ा और बंदरों को साथ लेकर चले गए. लेकिन पहरेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी.'

वैसे, यह चिड़ियाघर पहले भी अपने जानवरों नहीं बल्कि उनके कारनामों के लिए ही ख़बरों में रहा है. दिसंबर, 2007 में दो चिंपाजी अपने बाड़े से निकल आए थे.

रानी और बाबू नामक इन चिंपाजियों ने सर्दी की धूप का मजा ले रहे दर्शकों को काफी दौड़ाया था.

अपनी जान बचाने के लिए लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे थे. बाद में बड़ी मुश्किल से उस पर काबू किया जा सका था.

इसी चिड़ियाघर में अद्वैत नामक वह कछुआ भी था जिसकी उम्र डेढ़ से ढाई सौ साल के बीच बताई गई थी.

अद्वैत को सेशेल्स से लाकर किसी ने रॉबर्ट क्लाइव को उपहार के तौर पर दिया था.

रॉबर्ट क्लाइव 1770 के दशक में बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के शीर्ष अधिकारी थे. लंबे अरसे तक बीमार रहने के बाद कोई साढ़े तीन साल पहले उस कछुए की मौत हो गई थी.

अब इस अनूठी चोरी ने इस चिड़ियाघर को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है. इसके साथ ही इसकी सुरक्षा भी कई सवाल खड़े हो गए हैं.